खैरागढ़ का साल्हेवारा तहसील सिर्फ कागजों में:बैगा आदिवासी दफ्तर-दफ्तर भटक रहे, 100 किमी दूर जाना पड़ रहा

खैरागढ़ जिले के वनांचल क्षेत्र साल्हेवारा को तहसील का दर्जा मिलने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। यहां न तो कार्यालय बना है और न ही तहसीलदार नियमित रूप से पहुंच पा रहे हैं। स्थानीय उपलब्ध भवन में तहसील शुरू की गई और तहसीलदार की नियुक्ति भी की गई। लेकिन दूरी की वजह से तहसीलदार नियमित रूप से नहीं आ पाते। इसका खामियाजा यहां के बैगा समुदाय को भुगतना पड़ रहा है। साल्हेवारा के लोगों को एक हस्ताक्षर और मुहर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। कई बार उन्हें 60 से 100 किलोमीटर दूर खैरागढ़ जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि तहसील बनने के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। पहले एक जगह जाकर काम हो जाता था, अब हर दफ्तर में टाल-मटोल का सामना करना पड़ता है। तहसील भवन का निर्माण कार्य शुरू एडीएम प्रेम कुमार पटेल के अनुसार, साल्हेवारा में 20-25 पंचायतें शामिल हैं। तहसील भवन का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति भी की जा चुकी है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है। बैगा जनजाति के लिए विशेष पिछड़ी जनजाति के तहत कई योजनाएं हैं। इनमें राशन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका शामिल हैं। लेकिन इन सुविधाओं को पाने के लिए उन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार जेब से अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। महीनों इंतजार के बाद भी काम नहीं होता।

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