तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव 2025 का समापन 21 नवंबर की रात हुआ। यह आयोजन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के परिसर में संपन्न हुआ। महोत्सव के उद्घाटन दिवस पर अमेरिका के प्रो. बेंजामिन बून और कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने जुगलबंदी प्रस्तुत की। तबला वादक पं. गौरीशंकर कर्मकार, वृंदावन की गायिका विदुषी आस्था गोस्वामी और सोनहा बदर समूह ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। तीन दिवसीय इस सांस्कृतिक आयोजन में हजारों दर्शक शामिल हुए। संस्कृति मंत्री रहते बृजमोहन ने की शुरुआत समापन समारोह में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने संस्कृति मंत्री रहते हुए इस महोत्सव की शुरुआत की थी। उन्होंने विश्वविद्यालय को विश्व-स्तरीय पहचान दिलाने के लिए मिलकर प्रयास करने की बात कही। कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं से संबंधित प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपे, जिस पर शीघ्र निराकरण का आश्वासन मिला। शास्त्रीय संगीत और लोक प्रस्तुतियां हुई महोत्सव के अंतिम दिन शास्त्रीय संगीत और लोक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ। इसमें पं. हरीश तिवारी का शास्त्रीय गायन, पद्मभूषण पं. बुधादित्य मुखर्जी का सितार वादन, व्योमेश शुक्ला एवं समूह की ‘राम की शक्ति पूजा’ और डॉ. पीसीलाल यादव के नेतृत्व में दूधमोंगरा की लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुति शामिल थी। महोत्सव के दूसरे दिन राजा आर्यव्रत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय को दिए गए अपने पूर्वजों के योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों को कला साधना के लिए प्रेरित किया। सितार, सरोद, वायलिन और तबला वादन की सामूहिक प्रस्तुतियां कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में उनके नवाचारों के लिए ‘आत्मनिर्भर खैरागढ़ अभियान’ द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया। विद्यार्थियों ने सितार, सरोद, वायलिन और तबला वादन की सामूहिक प्रस्तुतियां दीं। तीन दिवसीय इस महोत्सव ने खैरागढ़ की कला और संगीत विरासत को प्रदर्शित किया। समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और खैरागढ़ विधायक यशोदा वर्मा उपस्थित थे।


