ग्वालियर में श्री रामजानकी गंगादास की बड़ी शाला ट्रस्ट की करोड़ों की संपत्ति से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट ने अहम आदेश पारित किया है। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगल पीठ ने कहा कि कलेक्टर रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट मामले की सुनवाई जारी रख सकते हैं, लेकिन कोर्ट की अनुमति के बिना कोई अंतिम फैसला नहीं ले सकते। कोर्ट ने राज्य शासन और प्रतिवादियों से 3 नवंबर तक जवाब मांगा है। ट्रस्ट में नियुक्ति पर विवाद यह मामला तब सामने आया जब कलेक्टर ने ट्रस्ट की संपत्ति की सुरक्षा के लिए आठ नए ट्रस्टी नियुक्त किए थे। इनमें राजेंद्र शर्मा, अरविंद दूदावत और ब्रजमोहन श्रीवास्तव सहित अन्य शामिल थे। महंत रामसेवक दास और रामबाबू अग्रवाल ने इस नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी थी। युगल पीठ के सामने मामला एकल पीठ ने 17 जून 2025 को पुराने आदेश को रद्द करते हुए कलेक्टर को नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था। राजेंद्र शर्मा और अन्य ट्रस्टी इस फैसले के खिलाफ युगल पीठ पहुंचे थे। संपत्ति बिक्री का विवाद ट्रस्टियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने तर्क दिया कि महंत ने लगभग 200 करोड़ रुपए की संपत्ति बेच दी थी, महंत को बेचने का कोई अधिकार नहीं था। इस कारण कलेक्टर ने नए ट्रस्टी नियुक्त किए थे। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद, ट्रस्ट की संपत्ति पर अंतिम निर्णय अब केवल न्यायालय की निगरानी में ही हो सकेगा।


