गजब सरकारी ट्रेनिंग…:सत्र अंतिम दौर में, अब शिक्षकों को सिखा रहे- कैसे पढ़ाएं

प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की अजब तस्वीर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और परीक्षाएं सिर पर हैं। ऐसे समय में, जब स्कूलों में पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी है, राज्य शैक्षणिक अनुसंधान परिषद (एससीईआरटी) ने शिक्षकों के लिए अब नए पाठ्यक्रम की ट्रेनिंग शुरू कर दी है। तीसरी कक्षा में पुराने चार विषयों की जगह दो नए कोर्स लागू किए गए हैं, जिनकी बारीकियां अब शिक्षकों को समझाई जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि शिक्षक अपनी समझ के अनुसार तीसरी के लगभग पौने चार लाख बच्चों को यह नया कोर्स पहले ही पढ़ा चुके हैं, इसके बावजूद उनसे अब पांच-पांच दिन की आवासीय ट्रेनिंग कराई जा रही है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि नया कोर्स पढ़ाने की ट्रेनिंग पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अप्रैल-मई में दी जानी थी। उसी हिसाब से ट्रेनिंग का शेड्यूल बनाया गया। लेकिन एससीईआरटी ने तब कार्यक्रम स्थगित कर दिया। शिक्षा का सत्र शुरू हुआ तब भी नए कोर्स को पढ़ाने की ट्रेनिंग का कार्यक्रम तय किया गया। बाद भी उसे भी कैंसिल कर दिया गया। बस्तर बिलासपुर के शिक्षकों को देर से ट्रेनिंग दी गई। लेकिन रायपुर, दुर्ग और बाकी जिलों में इसका शेड्यूल ही नहीं बनाया गया है। गणित और इंग्लिश कक्षा 6वीं के स्तर का :भास्कर ने प्रशिक्षण के बिना पढ़ाई करवा रहे कुछ शिक्षकों से नए विषय के बारे में जानकारी ली। शिक्षकों ने बताया कि आमतौर पर बच्चों के लिए जोड़-घटाना रखा जाता है। लेकिन नया कोर्स इससे आगे बढ़कर है। यही स्थिति अंग्रेजी की है। छठवीं में जिस तरह का कोर्स होता है, उसी स्तर का तीसरी के बच्चों के लिए रखा गया है। हिंदी भी बच्चों के लिए आसान नहीं है। योग और कला को छोड़कर बाकी अन्य विषय भी बच्चों तो दूर शिक्षकों को तुरंत समझ नहीं आ रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि प्रशिक्षण के बिना उनके लिए पढ़ाई कराना बेहद कठिन हो गया है। चरणबद्ध तरीके से शुरू करना है नया कोर्स नई शिक्षा नीति के तहत राज्य में पहली से 12 तक के कोर्स में बदलाव किया गया है। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना है। पहले चरण में कक्षा तीसरी तक का कोर्स बदलना है। आने वाले सत्र से चौथी का कोर्स बदलना है। उसके बाद छठवीं से आठवीं तक का कोर्स बदला जाएगा। ऐसा शेड्यूल इस वजह से तैयार किया गया है, ताकि बच्चों पर अचानक नए कोर्स का भार न पड़े। बच्चे सीख सकें जोड़-घटाना, नई शिक्षा नीति में यही बदलाव नई शिक्षा नीति बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता पर आधारित है। इसके तहत प्राथमिक स्तर पर ये तय करने का लक्ष्य है कि हर बच्चा तीसरी पास होने तक समझ के साथ पढ़ना-लिखना और मूलभूत गणित(जोड़-घटाव आदि)समझना सीख ले। उसी के तहत कोर्स बदला गया है। ये निपुण भारत मिशन का एक हिस्सा है। आधे से ज्यादा शिक्षक SIR में और बाकी ट्रेनिंग में एससीईआरटी ने शिक्षकों को ट्रेनिंग देने के लिए जो समय चुना इसे लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि राज्य में अभी एसआईआर प्रक्रिया चल रही है। आधे से ज्यादा शिक्षक एसआईआर ड्यूटी में है। कहीं एक तो कहीं दो शिक्षक ही बचे हैं। उसके बावजूद प्राथमिक शाला के शिक्षकों की नए कोर्स की ट्रेनिंग लगा दी गई है। सीधी बात – के. कुमार, संयुक्त संचालक एससीईआरटी बजट नहीं मिला था, इसलिए देर शिक्षा का सत्र गुजर गया, नए कोर्स की ट्रेनिंग अब क्यों दे रहे?
– हां, पर अभी परीक्षा तो दूर है। नया कोर्स शुरू किया गया है, इसलिए ट्रेनिंग दे रहे। इतनी देर क्यों हुई, अब क्या फायदा होगा?
– इसके कई कारण हैं। बजट देर से मिला। फायदे की बात है तो अभी कक्षाएं लगेंगी ही।

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