सरकारी अस्पतालों में मौत के बाद भी परिवारवालों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। मौत के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र पाने के लिए भी लोगों को हफ्तों तक भटकना पड़ रहा है। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए खासतौर पर बुजुर्गों को बार-बार सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। डेथ सर्टिफिकेट के बिना बीमा क्लेम, सरकारी सहायता, बैंक प्रक्रियाएं, उत्तराधिकार, पेंशन और कोर्ट से जुड़े कई जरूरी काम अटक रहे हैं। एम्स और जिला अस्पताल में 21 दिन बाद डेथ सर्टिफिकेट मिल रहा है तो अंबेडकर अस्पताल में एक महीने बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि अस्पताल में मौत के बाद ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम से मौत का पंजीयन दिल्ली में होता है। वहां से पंजीयन नंबर मिलने के बाद ही स्थानीय स्तर पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। सर्वर डाउन होना, स्टाफ की कमी, डॉक्टरों के सत्यापन में देरी, एमएलसी मामलों की फाइलों का अलग-अलग विभागों में अटक जाना और रिकॉर्ड सेक्शन की अव्यवस्था से प्रमाण पत्र मिलने में हफ्तों लग जाते हैं। अस्पताल वाले यह कहकर हाथ खड़े कर देते हैं कि पंजीयन का काम दिल्ली से होता है ऐसे में वे कुछ नहीं कर सकते। इसके चलते लोगों को भटकना पड़ता है। दिसंबर से भटक रही है बुजुर्ग गोगांव से आई एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि उनके पति ओमप्रकाश शर्मा की मौत 8 दिसंबर को हुई थी। मौत के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए एक माह बाद बुलाया। बुधवार 14 जनवरी को वह पहुंची तो उन्हें एमआरडी के स्टाफ ने कहा कि एक फॉर्म भरो। वो पढ़ी-लिखी नहीं थी उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति से फॉर्म भरवाया। फॉर्म जमा करने पर स्टाफ ने कहा कि अब 2-4 दिन बाद आना। बुजुर्ग ने कहा कि वो बार-बार वह आ नहीं सकती, इसलिए अभी प्रमाण पत्र दे दें, लेकिन स्टाफ ने इंकार कर दिया। 34 दिन बाद भी नहीं मिला राजिम से आए विकास ने बताया कि उनके पिताजी की मृत्यु 10 दिसंबर को मेकाहारा में हुई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए जब वे एमआरडी गए तब उन्हें एक माह बाद आने कहा गया। बुधवार 14 जनवरी को वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें भी एक फॉर्म भरने कहा गया। फॉर्म भरकर जब उन्होंने प्रमाण पत्र मांगा तो अगले हफ्ते आने कहा। विकास ने कहा कि आपने ही एक माह बाद आने कहा था, अब मैं 34 दिन बाद आया हूं तब भी अगले हफ्ते आने कह रहे हैं। मैं बहुत दूर से आता हूं, बार-बार नहीं आ पाऊंगा। स्टाफ वाले नहीं माने। इसलिए किया ऑनलाइन सिस्टम
दिल्ली में जन्म और मृत्यु का पंजीयन एक सेंटर सिस्टम के तहत होता है। इससे सभी रिकार्ड्स ऑनलाइन रहते हैं। जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण प्रक्रिया के बाद एक पंजीकरण नंबर से पहचान स्थापित करने और भविष्य के सत्यापन के लिए महत्वपूर्ण है। मृत्यु प्रमाण पत्र इसलिए जरूरी बीमा क्लेम, सरकारी सहायता और मुआवजा भी नहीं मिलता। }बैंक और जमीन-जायदाद से जुड़े काम नहीं होते। }कोर्ट मामलों में देरी और सुनवाई प्रभावित होती है। }पेंशन, उत्तराधिकार जैसे मामलों में अड़चन बढ़ती है। सीधी बात – डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, मेकाहारा समस्या जल्द दूर की जाएगी लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने में देरी हो रही है?
– तकनीकी समस्या से देरी हो जाती है।
परिजनों को एक-एक माह के बाद बुलाया जा रहा है?
– देरी क्यों हो रही है, जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा।
दूर-दराज से आने वाले लोगों को बड़ी परेशानी होती है?
– लोगों की जो भी समस्या है उसे जल्द दूर कर देंगे।


