जिला अस्पताल मुरार में ब्लड की जांच कराने के लिए बनाई गई नई व्यवस्था में स्थानीय कारणों से पहले दिन ही मरीजों को परेशान होना पड़ा। रोजाना यहां 300 से 325 ब्लड सैंपल आते हैं, लेकिन सोमवार को सिर्फ 135 मरीजों के सैंपल ही लिए गए। कारण यह था कि नई व्यवस्था में प्रत्येक मरीज को ब्लड सैंपल देने के लिए आधार कार्ड देना होगा और उस आने वाले ओटीपी बताने के बाद ही ब्लड सैंपल लिया जाएगा। परेशानी का विषय यह रहा कि लगभग 350 मरीजों की जानकारी एकत्र करने के लिए सिर्फ एक कंप्यूटर ऑपरेटर की ड्यूटी लगाई गई। इससे सैंपल देने वालों को लंबा इंतजार करना पड़ा। नई वयवस्था से अनभिज्ञ मरीजों को बिना सैंपल दिए ही लौटना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं के साथ गंभीर मरीजों के अटेंडेंट को हुई। गर्भवती महिलाओं को 4 घंटे से अधिक लाइन में लगने के बाद यह कहकर लौटा दिया गया कि आपका आधार कार्ड जिस मोबाइल पर लिंक है वही मोबाइल लेकर आओ। जिला अस्पताल में जहां प्रतिदिन 300 से 325 मरीजों के ब्लड के सैंपल आते हैं। इस साइड के चलते सोमवार को सिर्फ 135 सैंपल की जांच के लिए आए। इस अव्यवस्था के चलते मरीजों और स्टाफ के बीच झगड़े तक की नौबत आ गई थी। जिला अस्पताल मुरार में पैथोलॉजी का संचालन कियो सिटी साइंस हाउस कर रही है। कियो सिटी साइंस हाउस ने अब नया नियम लागू कर दिया है। अगर किसी मरीज पर आधारकार्ड नहीं है तो उसकी जांच जिला अस्पताल में नहीं होगी। इतना ही नहीं सैंपल देने की प्रक्रिया भी बहुत जटिल कर दी है। जांच के लिए मेडीक्विटी व्यवस्था, आधार लिंक मोबाइल के बिना जांच नहीं ये प्रक्रिया बन रही है परेशानी का कारण सैंपल देने आने वाले मरीज को पहले अपना आधार दिखाना होगा। आधार नंबर डालने पर इससे लिंक मोबाइल पर ओटीपी जाएगी। मरीज को यह ओटीपी बतानी होगी। इसके बाद ऑपरेटर दोबारा ओटीपी मांगेगा जिसके बाद मरीज का नाम आभा ऐप में लिंक होगा। इसके बाद मरीज को फिर पूरी जानकारी देनी होगी। इसके बाद मरीज के पर्चे पर एक नंबर सैंपल देने के लिए मिलेगा। टेक्नीशियन को ये नंबर दिखाने के बाद ही मरीज का सैंपल जमा होगा। मरीज बोले- परेशान कर रही है सरकार, लौटने को मजबूर भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. आरके राजौरिया, सेवानिवृत्त सीएमएचओ भर्ती मरीज के आईपीडी नंबर को लिंक किया जाए आधार कार्ड की अनिवार्यता से जांचों में गड़बड़ी होने की संभावना खत्म हो जाएगी। इस व्यवस्था को सरल बनाने के लिए ऐसा करना चाहिए कि ओपीडी में दिखाने आने वाले मरीज से एक ही बार ओटीपी मांगी जाए जिससे उसका समय बर्बाद न हो और प्रक्रिया में सरलता आए। साथ ही जो मरीज भर्ती हैं उनके लिए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि जब वह भर्ती हो रहा है उसी समय ओटीपी ले लिया जाए। जब डॉक्टर जांचें लिखे तो उसे बार–बार ओटीपी के लिए परेशान नहीं होना पड़े। ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है कि भर्ती होने वाले मरीज को जो आईपीडी नंबर है उसे ओटीपी से लिंक कर सभी जांचें की जाएं,जिससे मरीज को सैंपल देने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।


