भास्कर न्यूज | बेमेतरा पिछले करीब दो माह से जिला प्रशासन व कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों से ग्रीष्मकालीन धान फसल के बदले अन्य फसल की खेती के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराए गए है। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर बेमेतरा जिले में इस साल भी ग्रीष्मकालीन धान की खेती किसानों द्वारा की जा रही है। सर्वाधिक धान की खेती शिवनाथ नदी के दोनों ओर स्थित गांव में हो रहा है, जहां पर किसानों को शिवनाथ नदी से मोटर पंप के माध्यम से ग्रीष्मकालीन धान फसल के लिए पर्याप्त सिंचाई का साधन मिल जाता है। कृषि विभाग आए दिन धान के अलावा अन्य फसल की खेती करने वाले किसानों को धान के बदले चना, गेहूं, मसूर समेत अन्य खेती के लिए प्रोत्साहित करने की जानकारी दी जा रही है। जिले में लगभग 8 हजार एकड़ से भी अधिक कृषि भूमि में ग्रीष्मकालीन धान की खेती किसानों द्वारा की जा रही है। अभी भी किसानों के द्वारा ग्रीष्मकालीन खेती के लिए खेत तैयार कर रोपा लगाने का काम चल रहा है। किसान ग्रीष्मकालीन धान के प्रति रुझान बनाए हुए है। इस फसल की खेती से सिंचाई के लिए पावर पंप का उपयोग किए जाने से आगामी गर्मी सीजन में गंभीर निस्तारी और पेयजल संकट बढ़ने की संभावना दिखाई देने लगा है। पिछले वर्ष पूरे जिले में निस्तारी और पीने के पानी को लेकर गांव-गांव में हाहाकार की स्थिति बनी हुई थी। आज भी बेमेतरा नपा के कई वार्ड में टैंकर के माध्यम से पानी की सप्लाई की जा रही है। भूजल स्रोत में लगातार गिरावट के बावजूद कृषि विभाग के प्रयास से जिला प्रशासन को सफलता नहीं मिल पा रही है।


