गर्मी में मूंग की खेती करके किसान अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं

आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 9470147400 पर सिर्फ मैसेज करें। चतरा| मूंग एक दलहनी फसल है। इसे खरीफ एवं गर्मी में उगाई जाती है।गर्मी में मूंग की पैदावारी अधिक होती है। मूंग में प्रोटीन की माता 24 प्रतिशत होती है। किसान दलहन की पूर्ति गरमा मूंग की खेती से कर सकते हैं। यह फसल 60 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है। मूंग अपने जड़ में गांठ बना कर अपने लिए नेत्रजन इकट्ठा करती है है। जिसे मूंग की फसल अपने आवश्यकता अनुसार खाद के रुप में उपयोग करती है। यह मिटी सुधादक के रुप में भी महत्त्वपूर्ण है। जो अगले फसल में इसका लाभ मिलता है। अगर किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलव्ध हो मुख्य रूप निचली जमीन में इसे लगा सकते है। इस फसल की 2-3 सिंचाई की आवश्यकता होती है।एक एकड़ में 10-12 किलो बीज की आवश्यकता होती हैं। बीज को बिमारी से बचाव के लिए बीज का उपचार जैव रसायनों राइजोबियय और फास्फोरस घुलित जीवाज जीवाणु (पीएस (श्री) से करना चाहिए। मूंग की फसल में अधिक माता में नाइट्रोजन की आवश्यकता नहीं होती है। ग्रीष्मकालीन मूंग में 10-15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करना चाहिए। गर्मी के मौसम मूंग के फसल में रोग एवं कीट का प्रकोप कम होता है, जिसके कारण गर्मी में मूंग की उपज अधिक होती है। एक हेक्टेयर में 10-15 क्विंटल मूंग प्राप्त कर सकते हैं। बलवाई एवं केवाल मिट्टी इसके लिए उपयुक्त है। समय-समय पर खरपतवार का नियंत्रण करते रहे।इसकी उत्तम किस्म विराट ‌,गोल्ड , पुसा विशाल, एसभीएम -88 और आईपीएम 205-7 है। कम पड़ता है। अधिक उपज के लिए सावधानियां बीजों को उपचार करके ही लगाना चाहिये। सही समय पर बोआई करना चाहिए। देरी से बुआई करने पर फूल आने के समय तापमान बढ़ने से फलियां कम आती है। इससे मूंग की उपज प्रभावित होती है। देर से बोई गई फसल के परिपकव होने के साथ ही समय से पहले आने वाली मानसूनी बर्षा बत्ती से जुड़ी कई बिमारी का कारण बनती है।

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