मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि सिमरन की मौत के बाद पूरा मुलताई सकते में था। 3 मई 2023 की रात बीच सड़क पर उसका लहूलुहान पड़ा शरीर, और कुछ ही दूरी पर भागता हुआ उसका बॉयफ्रेंड सानिफ… ये सीन पुलिस के लिए शुरुआत भर था। लेकिन, कहानी में असली मोड़ तब आया, जब कोर्ट में पहुंचने पर एक-एक कर तीनों चश्मदीद गवाह पलट गए। सिर्फ वही नहीं-खुद सिमरन का भाई पिंटू भी अपने बयान से मुकर गया। अदालत में सभी ने एक ही बात कही- हम पर पुलिस ने दबाव डालकर बयान दिलवाया था। यानी जिस केस में गवाहों को सबसे बड़ा सहारा माना जा रहा था, उसी केस में अब कोई गवाह बचा ही नहीं था। यह वह पल था, जब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी थी- क्या बिना गवाह के भी साबित किया जा सकता है कि सानिफ ही कातिल है? अब पढ़िए आगे की कहानी… ब्लैकमेलिंग से तंग आकर वारदात
सिमरन और सानिफ की पहचान पुराने दिनों से थी। फोन पर लंबी बातें, रात-रातभर वॉट्सएप चैट और फिर एक दिन दोस्ती के रिश्ते ने प्यार का रूप ले लिया। सिमरन शादी का सपना देख रही थी…लेकिन सानिफ की दुनिया अलग दिशा में जा रही थी। उसके परिवार ने अमरावती की एक लड़की से उसकी शादी तय कर दी। और हैरानी की बात ये थी कि सानिफ इस शादी के लिए तैयार भी था। ये खबर सिमरन को मिली तो दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए। सिमरन के लिए ये बड़ा झटका था क्योंकि वो पहले से ही सानिफ को मन ही मन जीवनसाथी मान चुकी थी। ब्लैकमेलिंग की चैट रिकॉर्ड से पुष्टि
पुलिस ने जांच की तो चैट रिकॉर्ड से साबित हो गया कि सिमरन लगातार सानिफ पर शादी करने का दबाव डाल रही थी। सानिफ ने पुलिस को बताया कि सिमरन ने उसके कुछ निजी वीडियो बना लिए थे और उन्हीं के सहारे उसे ब्लैकमेल कर रही थी। कई बार उसने पैसों की मांग भी की, वह इन हरकतों से तंग आ चुका था। 3 मई: उम्मीदों के कत्ल की रात
रात 9 बजे सानिफ ने सिमरन को मिलने बुलाया। सिमरन को लगा- शायद वह मान गया है… शायद शादी की बात आगे बढ़ेगी…। वह स्कूटी से उसके घर के सामने पहुंची। सामने खड़ा था वह लड़का, जिससे वह जिंदगी भर की उम्मीदें लगाए थी। लेकिन अगले कुछ ही सेकेंड में उम्मीदें खून में बदल गईं। सानिफ ने जेब से चाकू निकाला और ताबड़तोड़ वार करना शुरू कर दिया- एक बार, दो बार… दस बार… कुल 26 बार। यह पूरी वारदात सानिफ के घर के बाहर लगे सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो चुकी थी। हमला करके वह भागा, लेकिन कुछ ही दूरी पर पानी की टंकी के पास पुलिस ने उसे पकड़ लिया। तीन चश्मदीद गवाह: तीनों बयान से पलटे
कोर्ट में पुलिस ने अमान हुसैन को पहले चश्मदीद के तौर पर पेश किया। अमान ने पुलिस के सामने सानिफ द्वारा सिमरन की हत्या करने का बयान दिया था। इस बयान का पुलिस के पास वीडियो भी था, लेकिन कोर्ट में अमान ने वीडियो में खुद के होने से इनकार कर दिया। अमान ने बताया कि पुलिस ने कहा था कि बयान नहीं दोगे तो मर्डर केस में फंसा देंगे। कोर्ट में गवाही के समय अमान ने कहा वह सानिफ और सिमरन को जानता है। उस रात किसी ने बताया कि मोहल्ले में मर्डर हो गया है। किसी अज्ञात ने सिमरन की हत्या कर दी है। सिमरन की हत्या किसने और क्यों की है, उसे जानकारी नहीं है। इसी तरह चश्मदीद गवाह सलीम खान और शेख नदीम भी अपने बयानों से पलट गए। दोनों ने कहा, उन्होंने सानिफ को सिमरन की हत्या करते नहीं देखा। पुलिस ने मार-पीट, डरा-धमकाकर कर कथन दर्ज कराया था।शिकायतकर्ता पिंटू उर्फ शहजाद खान भी कोर्ट में पलट गया। उसने भी मामले में सानिफ के होने से इनकार कर दिया। पुलिस ने बताया कि संभवत: शहजाद पर समाज के लोगों ने दबाव बनाया इसलिए वो पीछे हटने लगा। गवाह पलटे, लेकिन साइंटिफिक सबूतों से जुर्म साबित
गवाह अदालत में पलट चुके थे। बयान बेअसर साबित हो चुके थे, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। जो सबूत इकट्ठा किए थे, वह कत्ल की गवाही देने के लिए पर्याप्त साबित हुए। सानिफ के घर से खून से सनी टी-शर्ट मिली। डीएनए जांच में खून सिमरन का पाया गया। हत्या वाला चाकू भी वहीं से मिला। उस पर भी सिमरन का डीएनए और सानिफ के फिंगर प्रिंट थे। सिमरन का मोबाइल पूरी तरह टूटा हुआ था, लेकिन डेटा ने मर्डर का बड़ा राज खोला। वॉट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन ने साबित कर दिया कि दोनों में पैसे को लेकर गंभीर विवाद था। सबसे निर्णायक सबूत बना- सीसीटीवी फुटेज, जिसमें साफ दिख रहा था कि सानिफ खुद चाकू से हमला कर रहा है। फॉरेंसिक जांच ने फुटेज को 100 फीसदी असली माना। कोर्ट में फुटेज में दिख रहे युवक की पहचान सानिफ के रूप में हुई। ढाई साल बाद आया कोर्ट का फैसला
कोर्ट में सारे गवाहों के पलट जाने के बाद ये हत्या का आसान दिख रहा केस भी एक पहेली बन गया था। पुलिस को नए सिरे से जांच कर सबूत इकट्ठे करने पड़े। इस प्रक्रिया में करीब ढाई साल लग गए। 13 अक्टूबर 2025 को मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। मुलताई के द्वितीय सत्र न्यायालय ने लगभग ढाई साल की सुनवाई के बाद फैसला किया। कोर्ट ने माना कि आरोपी की शर्ट और चाकू पर सिमरन का डीएनए मिला। हत्या का दृश्य सीसीटीवी में कैद है। मोबाइल और चाकू पर सानिफ के फिंगर प्रिंट हैं। घटना से पहले दोनों में पैसे को लेकर विवाद था। आरोपी कई बार सिमरन को पैसे ट्रांसफर कर चुका था। इन सभी तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने सानिफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स का पार्ट-1 भी पढ़िए… 26 बार चाकू मारे…प्रेमिका का इतना जघन्य हत्याकांड क्यों?:आरोपी पकड़े लेकिन अदालत में चश्मदीद गवाह ही बदले, बोले- पुलिस ने जबरन बयान दिलवाए एक प्रेम कहानी का ऐसा अंत, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जिस प्रेमिका को वह अपनी जान से ज्यादा चाहता था, उसी की जान का दुश्मन बन बैठा। बीच सड़क पर चाकुओं से गोदकर उसने मोहब्बत का गला घोंट दिया। क्या थी उस रात की पूरी कहानी? पूरी खबर पढ़ें…


