गहनों जितना महंगा है पशुओं‌ का श्रृंगार:नागौर के श्रीरामदेव पशु मेले से गौवंश, ऊंटों व घोड़ों को सजाने का हर सामान

भारत में पशुओं को रंग-बिरंगा सजाने का एक अलग ही क्रेज है। राजस्थानी जहाज ऊंट, घोड़े, गौवंश और भैंस आदि को दूल्हा-दुल्हन की तरह बड़े चाव से सजाया जाता है। नागौर में चल रहे श्रीरामदेव पशु मेले में पशुओं के साथ ही पशु श्रृंगार के सामान की बिक्री भी काफी होती है। पशु मेले में रंग-बिरंगी दुकान दिखने वाली दुकानें पशुपालकों के साथ ही पर्यटकों‌ का ध्यान भी अपनी ओर खींच रहीं हैं। प्रशासन ने इन पशुओं व पशु मालिकों के लिए पशु चिकित्सालय व सामान्य चिकित्सालय की कई प्रकार की जांच करवाने के लिए टेंट लगाए हुए हैं। रामदेव पशु मेले में पशुओं की कई प्रकार की जांचें भी की जा रही हैं। नागौर रामदेव पशु मेले में बिकने के लिए आए पशुओं के साथ में लगी पशुओं के श्रृंगार की दुकाने लगी हुई हैं। इन दुकानों पर पशुओं को सजाने के लिए काफी चीजें मिलती हैं। पशुओं को दूल्हा-दुल्हन की तरह सजाने के लिए पशु मालिक दुकानों पर खरीददारी करने के लिए पहुंचते हैं। इन दुकानों पर ऊंट, घोड़े, बैल व अन्य जानवरों को सिर से लेकर पांव तक के पूरे शरीर को सजाने के लिए अलग-अलग तरीके के रस्सी व कई प्रकार के धातुओं से मिलकर बनाए गए आभूषण उपलब्ध है। इन आभूषणों की कीमत ₹100 से लेकर ₹30000 तक होती है। अलग-अलग पशु के लिए अलग-अलग आभूषण इन दुकानों पर मिलते हैं। बाजारों में आपने महिलाओं के आभूषणों की चमक-धमक तो देखी होगी जो उनकी खूबसूरती में इजाफा करते हैं। लेकिन गहनों से सजे ऊंट और घोड़े जब रेगिस्तान की रेत – रास्ते पर चलते हैं तो उनकी शान-ओ-शौकत बढ़ जाती है। रेगिस्तानी जहाज ऊंट व घोड़े के भी आभूषण होते हैं। पशुपालक भी अपने ऊंट, घोड़े व अन्य पशुओं को उसके आभूषण पहनाकर उसकी शोभा बढ़ाते हैं। यह सभी आभूषण श्रृंगार के लिए काम आते हैं। जब ऊंट को सवारी के लिए ले जाते हैं तब यह सभी आभूषण सवारी करने वालों का भी मन मोह लेते हैं।

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