गांधीसागर अभयारण्य में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम:चीता संरक्षण, पुनर्वास और पर्यटन संवर्धन पर छात्रों व समुदाय को दी गई जानकारी

मंदसौर जिले के गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर वन विभाग ने कई जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। वन मंडलाधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य चीता संरक्षण, उनके व्यवहार, पुनर्वास और पर्यटन संवर्धन के प्रति स्थानीय समुदाय तथा विद्यार्थियों को जागरूक करना था। ईको सेंटर रामपुरा पठार पर एक विशेष ‘चीता मित्र संवाद’ बैठक आयोजित की गई। इसमें अधीक्षक गांधीसागर ने चीता मित्रों को गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में चल रहे चीता प्रोजेक्ट के लाभों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि चीतों के सफल पुनर्वास से गांधीसागर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। चीता मित्रों को यह भी बताया गया कि चीतों के संरक्षण के लिए जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्हें जंगल क्षेत्र में चीतों के मानव के प्रति सामान्य व्यवहार और ग्रामीणों व पर्यटकों को अपनाने वाले सुरक्षा व व्यवहार नियमों के बारे में जानकारी दी गई। इस संवाद कार्यक्रम में ईको विकास समिति ग्राम रावलीकुड़ी के सदस्य, गेम रेंज अधिकारी पूर्व गांधीसागर पी.एल. रायकवार और गेम रेंज अधिकारी पश्चिम गांधीसागर पराग सेनानी उपस्थित रहे। अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गांधीसागर क्रमांक-03 के छात्र-छात्राओं ने चीता संरक्षण जागरूकता रैली निकाली। रैली में युवाओं ने “गांधीसागर हमारी शान-चीता हमारी पहचान” जैसे नारे लगाकर संरक्षण का संदेश फैलाया। कार्यक्रम के दौरान अधीक्षक गांधीसागर ने छात्रों को चीता पुनर्स्थापना परियोजना, इसके पर्यावरणीय, सामाजिक और पर्यटन संबंधित लाभों के साथ-साथ रोजगार निर्माण की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। रैली के बाद चीता संरक्षण विषय पर एक क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर गेम रेंज अधिकारी पी.एल. रायकवार, पराग सेनानी और वन विभाग का समस्त स्टाफ भी मौजूद रहा। देखिए तस्वीरें…

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