भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में इन दिनों महुआ फूल बीनने के चक्कर में ग्रामीण जंगलों में आग लगा रहे हैं, जिसकी वजह से गर्मी तो बढ़ ही रही है, साथ ही जंगली जानवरों का शिकार भी हो रहा है। जंगल में आग लगाने के बाद जानवर गांव की तरफ आ रहे हैं और शिकारियों के द्वारा इनका शिकार कर लिया जा रहा है। बस्तर भर में चारों तरफ इन दिनों जंगलों में आग लगी हुई है, सुबह से शाम तक जंगल सुलग रहे हैं, इस पर वन विभाग काबू नहीं पा रहा है। विभाग द्वारा महुआ सीजन से पहले हर साल जंगलों में ग्रामीण आग न लगाएं इसके लिए कार्यशाला आयोजित की जाती है, जिसमें ज्यादातर फारेस्ट के कर्मचारी शामिल होते हैं, जबकि गांवों में कोई जागरूकता अभियान इसको रोकने के लिए नहीं चलाया जाता है। वन कर्मियों के द्वारा चुनिंदा जगह पर ड्यूटी की जाती है, जिसका असर कहीं नहीं दिखता है। हजारों पौधे हो रहे रोज खाक: गर्मी की वजह से इन दिनों जंगल सूख गए हैं, एक चिंगारी से पूरा जंगल जलकर खाक हो रहा है। जिले में वन विभाग के द्वारा भूसारास घाटी, सातधार और एक-दो जगहों पर जंगलों में कोई आग न लगा दे इसके लिए कर्मचारी की तैनाती की गई है, और जिले में सबसे ज्यादा मोलसनार, उदेला, गढ़मिरी क्षेत्र में जंगलों में आग लगाई जा रही है। यहां विभाग के द्वारा किसी भी कर्मचारी की ड्यूटी नहीं लगाई गई है, न ही गांव में कोई मुनादी करवाई गई है कि आग लगाने पर कार्रवाई होगी। जंगलों में बेशकीमती पौधे भी जल रहे हैं, सागौन सहित और भी आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाले पौधे बस्तर के जंगलों में मौजूद हैं जिनका भी नुकसान हो रहा है। जंगल में लगाई जाने वाली आग को रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ वन विभाग की नहीं है, ग्राम पंचायत स्तर पर भी इसको रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए, पर पंचायत हमारा कार्य क्षेत्र नहीं होने की बात कर निकल जाती हैं, गांव के कोटवार, सरपंच, सचिव, वन मित्र सभी के प्रयास से जंगलों में लगाई जाने वाली आग को रोका जा सकता है।


