{मामला उस समय गर्माया जब हाईकोर्ट में इसको लेकर याचिका दाखिल हुई लंबिया गांव िजसका नामो-निशान करीब 40 साल पहले मिट चुका है। सिर्फ जमीन है, वह भी गमाडा ने एक्वायर कर रखी है। यहां मॉल चल रहे हैं, लेकिन घर एक भी नहीं है। इसके बावजूद इस गांव की वोटर लिस्ट में 51 वोट आज भी कायम हैं। ये लोग कौन हैं, कहां हैं, नहीं पता। हां, वोटर लिस्ट में इनके नाम कई साल से चलते ही आ रहे हैं। कई चुनाव बीतने के बाद गांव के नाम पर वोटर होना चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। मामला उस समय गर्माया जब हाईकोर्ट में इसको लेकर याचिका दाखिल हुई। कहा गया कि गांव कुंभड़ा और लंबियां में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी है। सोमवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि 8 हफ्ते के अंदर वोटों की जांच कर रिपोर्ट पेश की जाए। अगर वोट गलत पाए जाते हैं तो वोटों को हटाकर रिपोर्ट पेश की जाए। सच्चाई जानने के लिए मोहाली भास्कर की टीम बुधवार को कुंभड़ा के साथ लगते गांव लंबियां में गई। जमीनी हकीकत तो ये है कि अब इस नाम का कोई गांव मौके पर है ही नहीं। गांव की सारी जमीन को एक्वायर कर इसे गमाडा ने फेज-8 बना दिया है। पूरे शहर में फेज-8 ही एक ऐसा एरिया है, जहां कोई रिहायशी एरिया नहीं है। फेज-8 को गमाडा ने चंडीगढ़ सेक्टर-17 प्लाजा की तर्ज पर डेवलप करने की योजना बनाई है। फेज-8 में दो शॉपिंग मॉल तैयार हो चुके हैं, जबकि एक मॉल के लिए 550 करोड़ में साइट बेची जा चुकी है। कई चुनाव हुए, लेकिन वोटर लिस्ट नहीं बदली, न वोट काटे गए : बैदवान हाईकोर्ट में केस दायर करने वाले हरदीप बैदवान ने कहा कि गांव लंबियां का नामो-निशान नहीं है। यहां से सब कुछ उठा दिया गया है। अब किसी को गांव के बारे में पता भी नहीं है। इसके बावजूद गांव के नाम पर 51 वोट बनी हुई हैं। इतने इलेक्शन गुजर गए, लेकिन ये वोट लगातार चली आ रही हैं। कितनी बाद वोटर लिस्ट में संशोधन हुआ और कितनी बाद नए वोट बने और पुराने काटे गए, लेकिन ये वोट आज भी लिस्ट में शामिल हैं। इससे साफ पता चलता है कि वोटर्स लिस्ट को किस तरीके से बनाया जा रहा है। गांव का नाम भी लोग भूल गए होंगे… वर्ष 1972 से गांव लंबियां की जमीन पर कार वॉशिंग स्टेशन चला रहा हूं। अब तो इस गांव का नाम भी गुम हो गया है। जहां पर मेरा वॉशिंग स्टेशन है, अब उसे कुंभड़ा रोड के नाम से जाना जाता है। इस समय लंबियां की जमीन पर एक भी घर नहीं है। गांव में केवल एक कच्ची कॉलोनी ही बची थी। पक्के मकान तो पहले ही यहां से हटा दिए गए थे। कच्ची कॉलोनी भी करीब 5 साल पहले उठा दी गई है। -पवन कुमार गांव लंबियां के नाम पर अब सिर्फ एक गुरुद्वारा साहिब कई साल पहले गांव लंबियां की जमीन पर गुरुद्वारा संत मंडल अंगीठा साहिब स्थापित किया गया था। उस समय यह एक पुराना गांव हुआ करता था। ये गांव शहर के बीचों-बीच आता था, इसलिए गमाडा ने धीरे-धीरे गांव की सारी जमीन एक्वायर कर ली। यहां रहने वाले लोगों को उस समय के अनुसार मुआवजा या अन्य स्थानों पर जमीन देकर गांव खाली करवा लिया था। आज की बात की जाए तो केवल फेज-8 में गांव लंबियां के नाम से गुरुद्वारा संत मंडल अंगीठा साहिब ही मौजूद है। लेकिन पुराने पते पर वोट चलाने के लिए उस जमीन पर घर या पता होना चाहिए? बीएलओ से बोलकर इसे चेक करवाएंगे। जब डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन होगी तो उसमें सब क्लीयर हो जाएगा। अगर वोट गलत पाए जाएंगे तो उन्हें तुरंत लिस्ट से डिलीट करवाया जाएगा। वेरिफिकेशन में वोट गलत पाए गए तो काट देंगे: डीसी कोमल मित्तल, डीसी मोहाली
गांव की जमीन पर बना है फेज-8, यह एरिया अब रिहायशी ही नहीं… सीधी बात गांव लंबियां अब फेज-8 बन गया है। यह पूरी तरह से खत्म है, लेकिन वहां पर 51 वोटें हैं? ये लोगों की मर्जी होती है कि शिफ्ट होने के बाद भी अपनी वोट शिफ्ट करना चाहते हैं या अपनी वोट पुराने पते पर ही चलाना चाहते हैं।


