भास्कर न्यूज | रायगढ़ राज्य शासन की ओर से जमीनों के लिए जारी की गई नई गाइडलाइन के बाद रायगढ़ में प्रस्तावित रिंग रोड की राह और कठिन हो गई है। नई दर लागू होते ही रिंग रोड के लिए चयनित इलाकों में जमीनों की कीमतों में डेढ़ से दो गुना तक बढ़ोतरी हो गई है। इससे परियोजना की कुल लागत भी बढ़ गई है। पिछले बजट में राज्य सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए 180 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी। शहर की भीड़भाड़ को कम करने और भारी वाहनों को शहर के बाहर से ही डायवर्ट करने के लिए लगभग 25 किमी लंबे रिंग रोड का प्रारंभिक नक्शा तैयार कर लिया गया था। अब प्रोजेक्ट के लिए पुनरीक्षित बजट पास कराना होगा। पहले ही रिंग रोड की प्रक्रिया 10 महीने से ठप पड़ी है। अब नए मूल्य दरों के सामने आने के बाद इसमें और भी देर होना तय है। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद प्रस्तावित 11 गांवों में जमीनों की कीमतें अचानक बढ़ गईं हैं। गांवों की निजी भूमि को परियोजना के अधिग्रहण क्षेत्र में शामिल किया गया है, उनका रकबा लगभग 300 एकड़ से अधिक है। मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार सिर्फ घोषणा करती है, काम नहीं। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल शुक्ला का कहना है कि 10 महीने में रिंग रोड के नाम पर एक इंच भी प्रगति नहीं हुई है। एसडीएम महेश शर्मा के अनुसार नई गाइडलाइन का प्रभाव पड़ेगा, लेकिन परियोजना नहीं रुकेगी। नई गाइडलाइन से भूमि अधिग्रहण की लागत बढ़ेगी। इससे किसानों को अधिक मुआवजा मिलेगा। रिंग रोड सहित अन्य बड़े प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं। भू-अर्जन प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। {कुल स्वीकृत राशि: 180 करोड़ {प्रस्तावित लंबाई: 25 किलोमीटर {प्रभावित गांव: 11 {आवश्यक भूमि : 300 एकड़ {सर्वे पूरा: 10 महीने पहले {वर्तमान स्थिति: सर्वे के बाद काम ठप इन गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक परियोजना के लिए शासन ने पुसौर ब्लॉक के 11 गांव दर्रामुड़ा, गुड़गहन, जुरडा, पंडरीपानी, गोपालपुर, भिखारीमाल, टारपाली, लामीदरहा, आमापाल और भेलवा टिकरा का सर्वे कर जमीनों की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी है। विडंबना है कि 10 महीने बीत चुके हैं और सर्वे के बाद एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ा है।


