भास्कर न्यूज | बालोद शहर में गायत्री शक्तिपीठ में स्थापना दिवस मनाया गया। जिसमें बताया कि 24 दिसंबर 1981 को युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने की थी। मां गायत्री की मूर्ति स्थापना के साथ इस केंद्र को शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त हुआ, जो आज जिले का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। यहां प्रतिदिन गायत्री यज्ञ का नियमित संचालन किया जाता है। पूर्व प्रमुख ट्रस्टी श्यामा साहू ने बताया कि वर्ष 1981 में मात्र सात लोगों ने नगरवासियों के सहयोग से तथा अपने घरों के सोने-चांदी के आभूषण गिरवी रखकर इस गायत्री मंदिर का निर्माण प्रारंभ किया था, जो आज एक विशाल स्वरूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने बताया कि पूर्व ट्रस्टियों के कठोर परिश्रम से संगठन को मजबूती मिली। यहां 5 कुंडीय, 24 कुंडीय यज्ञ, आदर्श विवाह एवं हजारों संस्कार संपन्न कराए गए हैं। अब 108 कुंडी यज्ञ भी सफलतापूर्वक हुआ। नगर हीरक मंडल के अध्यक्ष आरपी यादव ने कहा कि बालोद में गायत्री माता की प्राण प्रतिष्ठा स्वयं एक सिद्ध पुरुष ने की थी। गुरुदेव ने गायत्री के साक्षात दर्शन कर युग निर्माण आंदोलन को विश्व स्तर पर प्रसारित किया और देश-विदेश में अनेक शक्तिपीठों की स्थापना की। इसी कारण बालोद की गायत्री शक्तिपीठ का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव को भूत, वर्तमान और भविष्य का ज्ञाता ऋषि माना जाता है। ब्लॉक समन्वयक लोचन राम ने ग्राम स्तर पर हीरक मंडल गठन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जिन गांवों में गायत्री परिजन नहीं हैं, उन्हें आसपास के गांवों से जोड़ा जाना चाहिए। जिला समन्वयक बीएल अठनागर ने जीवन में गुरु के महत्व को बताया और गुरुदेव द्वारा बताए गए यज्ञ, अनुयज्ञ एवं सात आंदोलनों को विश्व स्तर तक पहुंचाने की जरूरत बताई। गुरु का काम कभी छोटा-बड़ा नहीं होता प्रमुख ट्रस्टी हेमवती सिहरे ने कहा कि गुरु का कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, अच्छा कार्य ही वास्तव में बड़ा माना जाता है। उन्होंने रामायण के उदाहरणों के माध्यम से इस विषय को स्पष्ट किया। स्थापना दिवस से एक दिन पूर्व 12 घंटे का अखंड जप किया गया। दूसरे दिन प्रातः 4 बजे देव स्थापना पूजन के पश्चात 5 कुंडी गायत्री यज्ञ प्रारंभ हुआ। पुजारी रोशन साहू द्वारा संगीतमय यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें 100 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ओमप्रकाश गजेंद्र, राजेंद्र सिन्हा सहित सभी ट्रस्टी एवं गायत्री परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कमल साव ने किया।


