झारखंड सरकार गिग वर्कर्स की सुरक्षा, उनके हितों, अधिकारों और कल्याण के लिए कानून बना रही है। विधेयक की रूप रेखा तय कर ली गई है। श्रम विभाग ने विधानसभा के बजट सत्र में इसे पास कराया जाएगा। विधेयक का नाम झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण कल्याण) है। यदि विधेयक कानून का रूप लेता है, झारखंड गिग वर्कर्स पर कानून बनाने वाला राजस्थान के बाद दूसरा राज्य होगा। फिलहाल राज्य में करीब 50 हजार से अधिक गिग वर्कर्स हैं। इनके कल्याण के लिए राज्य में अभी कोई कानून नहीं है। नया कानून बनने से सुरक्षित कार्य वातावरण, स्वास्थ्य-दुर्घटना बीमा और सामाजिक सुरक्षा लाभ के तहत पेंशन और अन्य कल्याण योजनाओं का लाभ मिलेगा। बोर्ड में निबंधन के बिना कोई प्रतिष्ठान गिग वर्कर्स की सेवा नहीं ले सकेगा गिग वर्कर्स को ये होगा फायदा…
सामाजिक सुरक्षा के लिए कल्याण बोर्ड और कल्याण कोष की स्थापना होगी। इसमें सरकार, नागरिक और इलेक्ट्रॉनिक सेवा के प्रतिनिधि शामिल होंगे। गिग वर्कर्स से सेवा लेनेवाले प्रतिष्ठानों को उनका रजिस्ट्रेशन कराकर काम लेना होगा। यह बोर्ड के माध्यम से होगा। प्लेटफॉर्म प्रतिष्ठानों द्वारा गिग वर्कर्स को उचित पारिश्रमिक, व्यावसायिक सुरक्षा और पारदर्शिता को अनिवार्य करना होगा। एग्रीगेटर को वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2% बोर्ड में जमा करना होगा। अनुदान, सीएसआर फंड व दान से भी पैसा बोर्ड को मिलेगा। इन पैसों से गिग वर्कर्स, उनके परिजनों का बीमा, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के लिए काम होगा। जानिए… कैसे लागू होगा यह कानून
विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद राज्यपाल से स्वीकृति से अधिनियम बनेगा। उसे लागू कराने के लिए तय प्रावधानों के अनुरूप नियमावली बनेगी। गिग वर्कर्स की सुरक्षा, अधिकारों की रक्षा के लिए प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स कल्याण बोर्ड बनेगा। बोर्ड कल्याण उपायों की देखरेख करेगा। गिग वर्कर्स के लिए लाभ, योजनाएं और सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए जिम्मेदार होगा। कौन हैं गिग वर्कर्स: फ्रीलांस लेखक, डिजाइनर, प्रोग्रामर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करने वाले लोग। उबर और ओला जैसे कैब के ड्राइवर, स्वीगी और जोमैटो के डिलेवरी एजेंट और घरेलू सेवाओं में कार्यरत लोग।


