डीजीपी चयन व नियुक्ति नियमावली को मंजूरी:रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी अब डीजीपी का चयन

झारखंड में अब डीजीपी की नियुक्ति पर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता वाली कमेटी फैसला लेगी। यह फैसला मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। कैबिनेट ने नाम निर्देशन समिति के गठन पर भी मुहर लगा दी। बैठक में कुल नौ प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि कैबिनेट ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक के चयन और नियुक्ति नियमावली-2024 के गठन को मंजूरी दे दी है। डीजीपी के चयन के लिए छह सदस्यीय नाम निर्देश समिति गठित की है। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में बनी इस समिति में मुख्य सचिव, यूपीएससी द्वारा नामित सदस्य, जेपीएससी अध्यक्ष या उनके द्वारा नामित सदस्य ओर रिटायर्ड डीजीपी सदस्य होंगे। वहीं गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव या सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे। यह कमेटी डीजीपी के चयन के लिए पैनल बनाएगी। इसमें कम से कम तीन और अधिक से अधिक पांच नाम होंगे। हालांकि असाधारण परिस्थिति में तीन से कम नाम भी हो सकते हैं। चयन का आधार योग्यता और उपयुक्तता होगी। उपयुक्त अधिकारी की पहचान उनके सेवा इतिहास, कर्तव्य के लिए प्रशंसा पत्र, पुरस्कार मेडल, अन्य उपलब्धियां और पुलिस बल का नेतृत्व करने के अनुभव आदि के आधार पर तय होगा। अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का ब्योरा भी समिति काे उपलब्ध कराई जाएगी। अगर कोई अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर है, तो ऐसे में सूची तैयार करने के पहले राज्य सरकार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित करना होगा। वरना ऐसे अधिकारी के नाम पर विचार नहीं होगा। वंदना दादेल ने बताया कि यूपी में ऐसी व्यवस्था है। गौरतलब है कि झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति पर हाल में काफी विवाद हुआ था। अब नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे विवादाें पर विराम लग जाएगा। 2 वर्षों का होगा डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल राज्य सरकार नाम निर्देशन समिति द्वारा सिफारिश किए गए अधिकारियों की सूची से ही किसी को डीजीपी नियुक्त करेगी। नियुक्त डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्षों का होगा। अब तक क्या होता था…
झारखंड में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के चयन के लिए पहले संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) को राज्य सरकार आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल भेजती थी, जिसमें से तीन नामों काे स्वीकृत कर यूपीएससी उसे फिर राज्य सरकार को भेजता था। उन्ही तीन नामों से किसी एक को राज्य सरकार डीजीपी बनाती थी। पर, अब ऐसा नहीं होगा। इसलिए लिया फैसला…
वर्ष 2019 से डीजीपी के पैनल को लेकर यूपीएससी और राज्य सरकार के बीच विवाद होता रहा है। यही नहीं, पहले पैनल भेजने से लेकर डीजीपी की नियुक्ति तक करीब तीन-चार महीने का समय लग जाता था। नई व्यवस्था होने से अब सरकार को यूपीएससी को अधिकारियों के नाम का पैनल नहीं भेजना होगा, बल्कि यूपीएससी के अधिकारी ही यहां आएंगे। इससे समय भी बचेगा। विधानसभा सत्र 24 फरवरी से, 3 मार्च को पेश हो सकता है बजट कैबिनेट की बैठक में बजट सत्र आहुत करने को मंजूरी दी गई। बजट सत्र 24 फरवरी से 27 मार्च तक चलेगा। 3 मार्च को बजट पेश किया जा सकता है। इस बीच राज्य सरकार बजट निर्माण का काम करेगी। प्री बजट कार्यशाला के लिए संत जेवियर कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. सीमा अखौरी और उनकी टीम को नॉलेज पार्टनर के रूप में नॉमिनेशन के आधार चयनित करने की स्वीकृति दी गई।

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