झुंझुनूं जिले में अवैध और नियमविरुद्ध खनन का मुद्दा अब गरमाता जा रहा है। लंबे समय से चल रहे विरोध के बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज बामलास और हुकूमपुरा के ग्रामीणों ने मंगलवार को गुढ़ागौड़जी तहसील कार्यालय का घेराव किया। ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। मुख्य द्वार पर झड़प और पुलिस का कड़ा पहरा प्रदर्शनकारी जब तहसील परिसर पहुंचे, तो उन्होंने मुख्य द्वार के भीतर प्रवेश करने का प्रयास किया। स्थिति को भांपते हुए और सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस ने मुख्य गेट बंद कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई। गेट बंद होने के बाद ग्रामीण तहसील के मुख्य द्वार के सामने ही धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से रोकने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। मौके पर उदयपुरवाटी, गोठड़ा और गुढ़ागौड़जी थानों से भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। 15 दिनों से जारी है अनिश्चितकालीन धरना ग्रामीण पिछले 15 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एडवोकेट जयंत मूंड और जेपी महला ने बताया कि अवैध खनन से न केवल क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का भी दोहन किया जा रहा है। ग्रामीण कई बार लिखित में शिकायत दे चुके हैं, लेकिन अधिकारियों की चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
नियमविरुद्ध संचालित खानों को तुरंत बंद करना: जो खानें निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं कर रही हैं, उन पर ताला लगाया जाए। भारी वाहनों पर रोक: खनन क्षेत्रों से गुजरने वाले ओवरलोड ट्रैक्टरों और ट्रकों से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, उन पर अंकुश लगे। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।


