देवी अहिल्या बाई होलकर की 300वीं जन्मजयंती पर गुना में विश्वमांगलय सभा ने नाटक ‘राष्ट्रसमर्था’ का मंचन किया। महाराष्ट्र के नागपुर से आए 45 कलाकारों ने नाटिका की प्रस्तुति दी। प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय के निर्देशन पर आयोजन हुआ। संबोधित करते हुए राम प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि आज बहुत शुभ दिन है। एक अद्भुत नाटिका यहां प्रस्तुत की जा रही है। दुनिया में सबसे बड़ा और ऊंचा स्थान मां का है। ये सुंदर चित्रण समाज के लिए बहुत ही उपयोगी है। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई दी। आरएसएस के क्षेत्रीय कार्यवाह अशोक अग्रवाल ने कहा कि हम सब भी माता अहिल्याबाई के बारे में बहुत कम जानते थे। मैं भी उनके बारे में इतना नहीं जानता था। अब जब उन्हें जानना शुरू किया, तो पता चला कि वह केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं बल्कि उनका स्थान इससे कहीं ज्यादा था। माता अहिल्याबाई ने खासकी ट्रस्ट से सौ से ज्यादा मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया। काशी से लेकर कलकत्ता तक मंदिरों का निर्माण कराया। उनके विचारों को हम अपन जीवन में उतारें, यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। विश्वमांगलय सभा के काम के बारे में बताया
महाराष्ट्र से आईं शुभांगी सुनील मेंढे ने विश्वमांगलय सभा के बारे में जानकारी दी। साथ ही इस नाटिका के बनने से लेकर देशभर में इसकी प्रस्तुतियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि विश्वमांगलय सभा मुख्य रूप से चार कार्यों पर कार्य करने की बात कहती है। इनमें सेवा, सदाचार, सामर्थ्य और संस्कार शामिल हैं। विश्वमांगलय सभा की उतर भारत की संयोगिता डॉ अनुराधा कृष्णपाल यादव ने कहा, उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए आज की आधुनिकता को अपनाते हुए उनके संस्कार, उनकी प्रेरणा हमे अपने परिवार में ढालने की कोशिश करना है। उनके आदर्शों के संबंध में हमे कटि बद्धता रखते हुए अपने जीवन में उतारने की कोशिश करनी है। इसके बाद महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने सबसे पहले भगवान गणेश स्तुति प्रस्तुत की। इसके बाद कलाकारों ने देवी अहिल्याबाई के जीवन पर आधारित नाटिका प्रस्तुत की। इसमें उनके बचपन से लेकर होलकर राजवंश संभालने और मंदिरों के जीर्णोद्धार की कहानी को दर्शाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। तस्वीरों में देखिए आयोजन…


