गुना DEO को हाई कोर्ट से राहत:सस्पेंड कर मनपसंद जगह बहाली के लगे थे आरोप; विभाग के निलंबन आदेश पर मिला स्टे

शिक्षकों को लापरवाही पर सस्पेंड करने की जगह नोटिस भेजने के आरोपों में सस्पेंड हुए जिला शिक्षा अधिकारी को हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने फिलहाल निलंबन पर स्टे दे दिया है। ग्वालियर हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सोमवार को सुनवाई के बाद स्टे ऑर्डर दिया। DEO को 12 दिसंबर को सस्पेंड किया गया था। दरअसल, ये पूरा मामला 3 सितंबर से शुरू हुआ। एक शिक्षक की शिकायत जनसुनवाई में कलेक्टर के सामने पहुंची। कलेक्टर ने वहीं पर DEO चंद्रशेखर सिसोदिया से उस मामले में हुई कार्रवाई के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि इसमें शिक्षक को नोटिस जारी कर दिया गया है। DEO के इस जवाब पर कलेक्टर भड़क गए। उन्होंने DEO से कहा कि आप छह महीने से नोटिस-नोटिस कर रहे हो, ताकि आपकी दुकान चलती रहे। मैं किसी जगह देखकर आया हूं, सस्पेंड करिए उसे। हर जगह नोटिस देते रहते हो। हर दिन नोटिस। आप कौन होते हो नोटिस देने वाले। जब सस्पेंड करने का मैंने बोला तो आप क्यों नोटिस दोगे। आप को देना ही नहीं है नोटिस। सस्पेंड कौन करेगा? पढ़ना न लिखना, हर काम के नोटिस भेज रहे हो DEO ने कहा कि JD करेंगे या आप (कलेक्टर) करेंगे। इस पर कलेक्टर ने कहा कि तो मुझे करने दीजिए सस्पेंड, आप क्यों नोटिस दे रहे हैं? निलंबित करने के लिए नोटिस देने की जरूरत क्यों है। कोई नोटिस नहीं देना है, निलंबित करिए। पढ़ना न लिखना, हर काम के नोटिस भेज रहे हो। बुलाओ उस बाबू को जो नोटिस दे रहा है। देखते हैं कितना बड़ा नोटिसबाज है। आपने पिछले छह महीने से एक आदमी को सस्पेंड नहीं किया। क्यों आप नोटिस-नोटिस खेलते हो? जांच में अधिकारों के मिस यूज की बात सामने आई
इसके बाद कलेक्टर ने जांच बैठा दी। अगले ही दिन 4 सितंबर को ADM सहित अन्य अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और फाइलों की जांच की। इस जांच में कई ऐसे खुलासे हुए, जो चौंकाने वाले थे। कई दिन तक चली जांच में यह सामने आया कि DEO ने मनचाही जगह शिक्षकों की पोस्टिंग के लिए निलंबन और बहाली का तरीका अपनाया। दरअसल, शिक्षकों का तबादला प्रदेश स्तर और प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से होता है। DEO को तबादले का अधिकार नहीं है। लेकिन, वह निलंबित शिक्षक की बहाली जिले के किसी भी स्कूल में कर सकते हैं। इसी बात का DEO ने फायदा उठाया। कलेक्टर ने इस मामले में जिला पंचायत CEO की अध्यक्षता ने जांच समिति बनाई। समिति ने जांच कर अपनी रिपोर्ट पेश की। जांच में यह भी सामने आया कि अटैचमेंट पर भोपाल से रोक लगी, तो DEO ने अतिरिक्त प्रभार देकर अपने चहेतों को कार्यालय में अटैच कर अपने आसपास ही रखा। इतना ही नहीं किसी शिक्षक को मामूली गलती पर महीनों तक निलंबित रखा, तो किसी को गंभीर लापरवाही पर चंद दिनों में ही बहाल कर दिया। डीईओ चंद्रशेखर सिसौदिया के ऐसे ही कई कारनामे कलेक्टर द्वारा गठित समिति की जांच में सामने आए थे। इस दौरान जब अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग आयोजित की गई, तो उसमें भी अपने चहेतों को लाभ दिया। काउंसिलिंग में पारदर्शिता न रखते हुए पोर्टल पर सही जानकारी अपलोड नहीं की। अपने चहेते शिक्षकों को लाभ देने अन्य शिक्षकों की काउंसिलिंग के समय रिक्त जगह पोर्टल पर छिपाई और बाद में दूसरों को वहां ट्रांसफर कर दिया। इसी तरह लगभग 32 बिंदुओं पर DEO के कार्यों की जांच की गई, जिसमें वह दोषी पाए गए। शिक्षा विभाग ने किया सस्पेंड
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन भेजा था। प्रतिवेदन पर कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग ने DEO चंद्रशेखर सिसोदिया को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही उन पर विभागीय जांच भी बिठाई गई था। निलंबन अवधि में उन्हें कार्यालय लोक शिक्षण संचालनालय ग्वालियर अटैच किया गया था। सिंगल बेंच से नहीं मिली थी राहत
विभाग के आदेश के खिलाफ DEO हाई कोर्ट गए। 18 दिसंबर को सिंगल बेंच ने सुनवाई की। सिंगल बेंच ने कहा कि DEO को अपने वरिष्ठ कार्यालय में अपील करनी चाहिए। हालांकि, DEO को सस्पेंड वरिष्ठ कार्यालय ने ही किया था, ऐसे में DEO ने डबल बेंच में अपील की। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए डबल बेंच ने निलंबन पर स्टे दे दिया। आजाद अध्यापक संघ और प्रांतीय शिक्षक संघ ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है।

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