अमनदीप सिंह वल्ला गांव स्थित गुरुद्वारा कोठा साहिब में हर साल लगने वाला ऐतिहासिक और धार्मिक ‘वल्ला कोठे दा मेला’ एक बार फिर श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। यह मेला श्री गुरु तेग बहादर जी के वल्ला गांव आगमन की स्मृति में आयोजित किया जाता है और अमृतसर के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है। सवा महीने तक चलने वाला यह मेला 10 मार्च तक जारी रहेगा। मेले का पहला रविवार 8 फरवरी को पड़ने के कारण संगतों का आना शुरू हो चुका है। हर साल जहां करीब 5 लाख श्रद्धालु गुरुद्वारा कोठा साहिब में माथा टेकने पहुंचते हैं, वहीं इस बार 7 लाख से अधिक संगत के दर्शन करने की उम्मीद जताई जा रही है। इस मेले में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी संगत गुरुद्वारा साहिब पहुंचती है। मेले को लेकर गुरुद्वारा परिसर और आसपास के इलाकों में रौनक बढ़ने लगी है। गुरुद्वारे के बाहर खुले मैदान में युवाओं द्वारा पतंगबाजी की परंपरा निभाई जा रही है, जो इस मेले की एक खास पहचान है। वहीं दुकानों पर सामग्री, खिलौने और खाने-पीने की वस्तुओं की सजावट शुरू हो चुकी है। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए झूलों की व्यवस्था भी की जा रही है। ‘वल्ला कोठे दा मेला’ उस ऐतिहासिक घटना की याद में शुरू हुआ जब श्री गुरु तेग बहादर जी अमृतसर में श्री हरमंदर साहिब के दर्शन के लिए आए थे, लेकिन तत्कालीन मसंद ने गुरुजी के लिए दरवाजे बंद कर दिए। इसके बाद गुरु तेग बहादर जी अमृतसर छोड़कर वल्ला गांव पहुंचे और एक पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम किया। वल्ला गांव की एक धर्मनिष्ठ महिला माता हरो ने गुरुजी का स्वागत किया और गुरु तेग बहादर जी 17 दिन तक उनके कच्चे घर (कोठे) में ठहरे। प्रसन्न होकर गुरु जी ने वल्ला की संगत और माता हरो को आशीर्वाद देते हुए कहा, ‘माइयां रब्ब रझाइयां’। तभी से इस स्थान को गुरुद्वारा कोठा साहिब के नाम से जाना जाने लगा और इस ऐतिहासिक स्मृति को संजोने के लिए ‘कोठे दा मेला’ शुरू हुआ। मेले के दौरान संगत गुरुद्वारे में माथा टेकती है, लंगर छकती है और गांव के खेतों में बड़ी संख्या में लोग पतंग उड़ाते हैं। माघ महीने के दौरान, विशेषकर रविवार को, यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। गुरुद्वारा कोठा साहिब के मैनेजर रछपाल सिंह ने बताया कि हर साल वल्ला गांव में गुरुद्वारा कोठा साहिब में यह ऐतिहासिक मेला आयोजित किया जाता है, जिसे ‘वल्ला कोठे दा मेला’ कहा जाता है। यह मेला गुरु तेग बहादर जी के आगमन की स्मृति से जुड़ा हुआ है। सवा महीने चलने वाले इस मेले में हर साल लाखों संगत दर्शन करने पहुंचती है और इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। संगतों की मांग पर मेला 10 मार्च से बढ़ाया भी जा सकता है। -रछपाल सिंह, मैनेजर गुरुद्वारा कोठा साहिब


