सतीश कपूर| नवरात्र में दुर्ग्याणा मंदिर में लगने वाले लंगूर मेले में शहर के कई बजरंगी सेना वाले हनुमान का रूप धारण करते हैं। यह बजरंगी सेना पीतल की छोटी बड़ी गदा (गुर्ज) लेकर नाचते आते हैं। यह गदा दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों से नहीं बल्कि गुरु नगरी के बाजार काठियां जैन गली निवासी आयु 34 वर्षीय ईशान विग खुद तैयार करते हैं। ईशान अब गदा के साथ-साथ देवी-देवताओं के सोने का पानी चढ़े पीतल वाले मुकुट भी तैयार करते हैं। उनके द्वारा तैयार गदा और मुकुट लंदन और मलेशिया में पहुंच गए हैं। ईशान के मुताबिक उनके द्वारा तैयार पीतल के 15 मुकुट तीन महीने पहले ही लंदन के एक मंदिर में भेजे गए। वहीं यह मुकुट लंदन के श्री राधा कृष्ण, गणेश जी, राम परिवार, हनुमान जी श्री लक्ष्मी नारायण जी की शोभा बढ़ा रहे हैं। ईशान बताते हैं कि उनके दादा जी पहले गुरुद्वारा साहिब और मंदिरों के गुंबदों में लगने वाले पीतल के कलश बनाते थे। दादा जी के बाद पिता हरीश कुमार विग ने कामकाज संभाला और पीतल की गदा बनानी शुरू की। तीसरी पीढ़ी से चल रहे काम को आगे बढ़ाते अब वह खुद (ईशान) देवी देवताओं के मुकुट तैयार करते हैं। जिसकी कीमत 40 से 65 हजार के भीतर होती है। लंदन भेजा पीतल का मुकुट ग्रेजुएशन तक पढ़े ईशान बताते हैं कि उनके पिता जी ने अपने साथ काम सिखाया और पिछले 16 सालों से 400 ग्राम से लेकर 70 फीट तक की गदा तैयार कर चुके हैं। उनके द्वारा तैयार की गदा मलेशिया समेत जम्मू,कश्मीर, दिल्ली, मुंबई, लुधियाना, पठानकोट, सालासर बाला जी, मेहंदीपुर बालाजी, महाराष्ट्रा, बटाला, दिल्ली समेत देश के अन्य राज्यों में जा चुकी है। प्रभु श्री राम जी और हनुमान जी का नाम लेकर जब गदा तैयार की जाती है तो उनकी बाजुओं में खूद जोश भर जाता है। जिसके बाद दो से तीन दिनों में गदा तैयार हो जाती है। जिसके रेट साइज के हिसाब से 2 से लेकर 80 हजार तक होता है। ईशान के मुताबिक वैसे तो गदा में स्टील के बाल डाले जाते हैं ताकि उसमें से आवाज आ सके। परंतु मलेशिया में भेजी 4 गदा सिंपल तैयार की गई। क्योंकि गदा में बाल की आवाज आने से उन्हें विदेश में ले जाना मुश्किल था। ग्राहक के आर्डर के अनुसार राम नाम, फूल, बूटी और बेल वाली गदा तैयार की जाती है।


