भास्कर न्यूज | लुधियाना दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के कैलाश नगर आश्रम में आयोजित सत्संग में संस्थापक दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वीणा भारती ने गुरु कृपा, ब्रह्म ज्ञान, ध्यान साधना और संत शरण के महत्व पर विस्तृत प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि जब परमपिता परमात्मा साकार रूप में अवतरित होता है, तो उसकी कृपा संपूर्ण मानव जाति को सींचती है, लेकिन संकीर्ण दृष्टि के कारण इंसान कई बार इसका अनुभव ही नहीं कर पाता। उन्होंने बताया कि सत्संग का संदेश मिलना, पूर्ण संत की शरण में जाना, ब्रह्म ज्ञान से जुड़ना और ध्यान साधना में उतरकर परम प्रकाश का दर्शन करना ये सभी अनुभव गुरु कृपा के बिना संभव नहीं। साध्वी ने कहा कि मनुष्य कितना ही पुरुषार्थ कर ले, लेकिन गुरु कृपा के अभाव में उसका फल स्थायी नहीं हो सकता। पुरुषार्थ रूपी बीज तभी अंकुरित होता है जब उस पर गुरु कृपा की वर्षा होती है। जीवन में कई बार इंसान स्वयं को अकेला और असहाय पाता है क्योंकि बिना गुरु कृपा के पुरुषार्थ का परिणाम क्षणिक रहता है, जबकि गुरु कृपा चिरस्थायी आनंद देती है। गुरु कृपा वह सुगंध है जो हर कर्म को सुवासित करती है और असंभव को भी संभव बना देती है। उन्होंने संत नामदेव, तुलसीदास, मीराबाई, सहजौ बाई, स्वामी विवेकानंद और शिवाजी जैसे भक्तों के उदाहरण देकर बताया कि उनका आध्यात्मिक उत्थान गुरु कृपा से ही संभव हुआ। कार्यक्रम में साध्वी मनु भारती और जगदीपा भारती ने भजन प्रस्तुत किए, जिनसे भक्तजन भाव-विभोर हो उठे।


