दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा मजीठा रोड स्थित गोपाल मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्री शिव कथा का समापन श्रद्धा के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन साध्वी मनस्विनी भारती ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का मार्मिक वाचन किया। साध्वी जी ने कहा कि शिव परमात्मा का स्वरूप हैं और पार्वती आत्मा का। इनका मिलन मानव को जीवन के वास्तविक लक्ष्य-आत्मज्ञान- के प्रति सजग करता है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार हिमालय राज और मैना नारद जी के बोध के बिना साक्षात शिव-शक्ति को नहीं पहचान पाए थे, उसी प्रकार मनुष्य भी अपने भीतर स्थित ईश्वर को तब तक नहीं जान सकता, जब तक उसके जीवन में पूर्ण गुरु का आगमन न हो। गुरु शब्द की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा, ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रू’ का अर्थ प्रकाश है। जो अंतःकरण के अंधकार को आत्मज्ञान से मिटा दे, वही सच्चा गुरु है। आज समाज में व्याप्त वैमनस्य, संस्कारहीनता और अपराधों का मुख्य कारण आध्यात्मिक ज्ञान का अभाव है। जिस प्रकार अंगुलिमाल डाकू और सज्जन ठग गुरु की शरण में आकर भक्त बन गए, वैसे ही आज के समाज को भी ब्रह्मनिष्ठ गुरु की आवश्यकता है। इस आध्यात्मिक समारोह में कैलाश कल्लन, विनोद आनंद, सुभाष शर्मा, सुनील आनंद, राकेश तुली, नरेश आनंद सहित संजीव सेठ, बलदेव राज मेहरा, अश्वनी महाजन और अन्य गणमान्य सज्जनों ने हाजिरी भरी।


