गुरु तेग बहादुर शहिदी दिवस पर तीन दिवसीय आयोजन:बड़वाह में ज्ञानी कुलविंदर सिंह के जत्थे ने कराए कीर्तन; संगत ने श्रद्धा से सुने शबद

सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर साहेब जी के शहीदी दिवस पर बड़वाह स्थित गुरुद्वारा में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुए। अंतिम दिवस शाम के दीवान में ज्ञानी कुलविंदर सिंह खरड़ जी के जत्थे ने गुरुबाणी कीर्तन कर संगत को भावविभोर किया। कीर्तन में गूंजे शहादत के शबद जत्थे ने गुरु साहेब की शहादत को समर्पित शबद “तिलक जंञू राखा प्रभ ताका… सीस दीया पर सिरर न दीआ” का कीर्तन कर श्रद्धालुओं को गुरुजी के अद्वितीय बलिदान की याद दिलाई। दीवान के दौरान संगत ने “वाहेगुरु वाहेगुरु” सिमरन में शामिल होकर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। ‘धर्म और मानवता की रक्षा का प्रतीक था बलिदान’ गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष रविंदर सिंह भाटिया ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहेब का बलिदान केवल धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए था। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने सत्य, न्याय और स्वतंत्रता के लिए अपना शीश समर्पित किया, इसलिए उन्हें ‘हिंद की चादर’ कहा जाता है। संगत का किया धन्यवाद, लंगर हुआ समिति के सचिव सरदार मनप्रीत सिंह और सरदार सतविंदर सिंह ने तीन दिनों तक आयोजित कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए संगत का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम से पूर्व जत्थे का स्वागत सरदार रमिंदर सिंह के निवास पर किया गया था। आयोजन में सरदार जसप्रीत सिंह, सरदार जसपाल सिंह, सरदार गुरुचरण सिंह, सरदार भूपेंदर सिंह और सरदार त्रिलोचन सिंह का विशेष सहयोग रहा। अंत में सभी श्रद्धालुओं के लिए लंगर का वितरण किया गया। कार्यक्रम की जानकारी समिति के मीडिया प्रभारी सरदार परविंदर सिंह ने दी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *