गेतलसूद और हटिया डैम में 11 फीट कम पानी, अगस्त की बारिश से आस

जुलाई समाप्त होने को है, लेकिन रांची के तीनों प्रमुख जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में पानी का भंडारण काफी कम है। इसका सबसे बड़ा असर शहर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि रांची की 90% से अधिक आबादी की जलापूर्ति गेतलसूद डैम पर निर्भर है। फिलहाल जलापूर्ति सामान्य है, लेकिन अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम बारिश हुई तो आने वाले महीनों में पेयजल प्रबंधन चुनौती बन सकता है। इस वर्ष जून-जुलाई में अपेक्षित बारिश नहीं होने से रांची में अब तक सामान्य से करीब 15% कम वर्षा दर्ज की गई है। गेतलसूद डैम की कुल क्षमता 36 फीट है, लेकिन 29 जुलाई तक जलस्तर 25.03 फीट रहा, जो क्षमता से करीब 11 फीट कम है। हटिया डैम का जलस्तर 38.05 फीट से घटकर 27.09 फीट पर पहुंच गया है, यानी करीब 11 फीट कम। वहीं गोंदा डैम में भी पिछले वर्ष की तुलना में 4 फीट कम पानी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब अगस्त और सितंबर की बारिश ही आगे की स्थिति तय करेगी। शहर के लिए इसलिए अहम है गेतलसूद डैम रांची की 90% से अधिक आबादी को यहीं से पेयजल की आपूर्ति होती है।
प्रतिदिन 35-37 एमजीडी पानी सप्लाई की जाती है।
जलस्तर कम रहने पर गर्मी में जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
अगस्त-सितंबर में अच्छी बारिश होने पर जलाशय तेजी से भर सकते हैं। 29 जुलाई को डैमों का जलस्तरडैम पिछले वर्ष इस वर्ष क्षमता गेतलसूद 30.09 25.03 36 हटिया 38.05 27.09 38 गोंदा 25.05 24.02 28
(जलस्तर फीट में) फिलहाल पानी की आपूर्ति सामान्य, लेकिन नजर अगस्त-सितंबर की बारिश पर, कम हुई तो संकटपेयजल विभाग के अधिकारियों के अनुसार फिलहाल शहर में जलापूर्ति सामान्य है और उपलब्ध जल भंडारण से नियमित आपूर्ति की जा रही है। हालांकि यदि अगले दो महीनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जलाशयों में पर्याप्त स्टोरेज नहीं बन पाएगा। इसका असर अगले गर्मी के मौसम में पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है बारिश के रुख पर नजर रखना जरूरी : अभी घबराने की जरूरत नहीं है। अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश होने पर भी डैम तेजी से भर सकते हैं। इसलिए अभी जलसंकट की आशंका जताना जल्दबाजी होगी। हालांकि बारिश के रुख पर लगातार नजर रखना जरूरी है। बारिश कम हुई तो संकट बढ़ सकता है।

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