गुरुओं को सम्मानित करती छात्रा। भास्कर न्यूज । बहरागोड़ा वनवासी कल्याण केन्द्र, झारखंड की संबद्ध इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बहरागोड़ा में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति, उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य व आचार्यों ने भारत माता, मां सरस्वती और आदिगुरु महर्षि वेदव्यास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन व पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के बीच प्रेरणादायक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान जयप्रकाश गिरि, द्वितीय स्थान बासी किस्कु, तृतीय स्थान आरोही अग्रवाल को मिला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण गुरु पूजन रहा। भैया-बहनों ने अपने आचार्यों का तिलक लगाया। पुष्प अर्पित किए। उपहार भेंट किए। आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने गुरु वंदना, देशभक्ति गीत, नृत्य, संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। सभी का मन मोह लिया। विद्यालय के आचार्यों ने महर्षि वेदव्यास जी के जीवन प्रसंग साझा किए। विद्यार्थियों को गुरु-भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य वासुदेव प्रधान ने उपस्थित सभी अतिथियों, अभिभावकों, आचार्यों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी से गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने का आह्वान किया। कार्यक्रम का विधिवत समापन शांति मंत्र के पाठ, प्रसाद वितरण के साथ हुआ। धालभूमगढ़| धालभूमगढ़ स्थित स्वामी विवेकानंद गुरुकुलम में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गुरु वंदना से हुआ। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन की ओर से श्रेया विश्वास और तन्मय सिंह सोलंकी ने सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षक-शिक्षिकाओं को शुभकामनाएं दीं। प्रधानाचार्य शुभाशीष टैगोर ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु केवल शिक्षा नहीं देते। वे अपने संस्कार, मार्गदर्शन और प्रेरणा से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। वे उन्हें सफलता की राह दिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों का सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने उनके आदर्शों का अनुसरण करने की बात कही। कार्यक्रम में तन्मय सिंह सोलंकी और श्रेया विश्वास ने अनुशासन, नैतिक मूल्यों, संस्कार और परिश्रम को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय और प्रेरणादायक वातावरण से भर दिया। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमामय समापन हुआ।


