गेतलसूद डैम में राज्य का सबसे बड़ा फ्लोटिंग पावर प्लांट तैयार, अप्रैल में हो सकता है चालू

गेतलसूद डैम में लगाए गए सोलर प्लेट, डैम के पास बन रहा ग्रिड झारखंड के सबसे बड़े और पहले फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। मार्च से अप्रैल के बीच प्लांट से उत्पादन शुरू होने की संभावना है। करीब 800 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण जेबीवीएनएल सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) करवा रहा है। 172 हेक्टेयर क्षेत्र में यह प्लांट स्थापित किया जा रहा है। राज्य में यह सोलर से 100 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाला पहला बड़ा प्लांट होगा। यह प्लांट करीब 60 करोड़ रुपए की बिजली हर साल उत्पा​दित करेगा, जो हटिया और नामकुम ग्रिड को मिलेगी। जेबीवीएनएल इसकी बिजली लेगा और आपूर्ति करेगा। इससे उत्पादित बिजली की दर कम होगी, क्योंकि लागत कम आएगी।

रांची को मिलेगी प्लांट से उत्पादित बिजली चांडिल डैम में 600 और तेनुघाट डैम में भी 400 मेगावाट का फ्लोटिंग प्लांट लगाने की तैयारी राज्य सरकार की सोलर ऊर्जा नीति के तहत अगले पांच वर्षों में झारखंड के तीन दर्जन से ज्यादा डैम और जलाशयों के ऊपर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जेरेडा द्वारा राज्य का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट चांडिल डैम में बनना है। यहां 600 मेगावाट का प्लांट बनेगा। उसका सर्वे कार्य पूरा हो गया है। तेनुघाट डैम में भी 400 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट बनना है। इन दोनों प्लांट का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत होगा। सोलर प्लांट की ये हैं विशेषताएं 172 हेक्टेयर क्षेत्र में 100 मेगावाट क्षमता का पहला बड़ा प्लांट स्थापित किया जा रहा है। सोलर पैनल डैम के पानी की सतह पर तैरते रहेंगे, सतह ढंकी रहने से वाष्पीकरण कम होगा, जो जल संरक्षण में मदद करेगा। पानी की ठंडक के कारण सोलर पैनल जमीन पर लगे पैनलों की तुलना में बेहतर कार्य करेंगे। यह प्लांट स्वच्छ ऊर्जा देगा, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा। पानी की सतह का उपयोग करने से भूमि की बचत होगी। प्लांट से स्थानीय मछुआरों की आजीविका और हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी दावा।

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