हनुमानगढ़ में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव सुबीर कुमार ने गुरुवार को टाउन धानमंडी में गेहूं खरीद केन्द्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जांच की। प्रमुख सचिव ने व्यापारियों से बात कर एफसीआई व कृषि उपज मंडी समिति की ओर से गेहूं की सरकारी खरीद के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। प्रमुख सचिव सुबीर कुमार ने एफसीआई अधिकारियों को गेहूं का शीघ्र उठाव व किसानों के बैंक खाते में खरीद के निर्धारित समय में भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिला कलेक्टर कानाराम भी साथ रहे। जिला कलेक्टर ने प्रमुख सचिव को अवगत करवाया कि अब तक ढाई लाख एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। जबकि पिछले साल इस समय तक 80 हजार एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। खरीद व उठाव पिछले साल से तीन से चार गुना ज्यादा है। इस दौरान फूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन संस्था व व्यापार संघ संस्था के प्रतिनिधियों ने प्रमुख सचिव से मुलाकात कर उन्हें व्यापारियों की समस्याओं से अवगत करवाया। फूडग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन संस्था अध्यक्ष नरोत्तम सिंगला ने प्रमुख सचिव को अवगत करवाया कि समर्थन मूल्य पर प्रति वर्ष एफसीआई की ओर से गेहूं की खरीद की जाती है। विगत कई वर्षों से मंडी में राज्य सरकार की ओर से नियत आढ़त दर 2.25 प्रतिशत से कम आढ़त राशि का भुगतान एफसीआई की ओर से मंडी के क वर्ग दलाल व्यापारियों को कर आर्थिक क्षति कारित की जा रही है। सिंगला ने बताया कि मंडी में किसानों के कृषि जिन्स लाने के बाद क वर्ग दलाल व्यापारी की ओर से कृषि जिन्स की सुरक्षा प्रदान की जाती है। सफाई इत्यादि करवाई जाती है और गुणवत्ता में सुधार कर अधिकतम मूल्य का भुगतान करवाया जाता है परन्तु क वर्ग दलाल व्यापारी को मजदूरों, दुकान के खर्चों, किराया इत्यादि तथा मुनीम सहित अपने परिवार का भरण-पोषण इस आढ़त राशि से होता है परन्तु एफसीआई की ओर से राज्य सरकार की तय दर से कम आढ़त का भुगतान कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। संस्था सचिव सन्नी जुनेजा ने बताया कि रबी सीजन 2025-26 के दौरान गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इस पर आढ़त राशि 2.25 प्रतिशत दर से 54.56 रुपए प्रति क्विंटल बनती है, का भुगतान करवाया जाए न कि गत सालों की भांति 41.40 रुपए प्रति क्विंटल दर से। व्यापार संघ संस्था अध्यक्ष राजकुमार सोडा ने बताया कि आढ़त दर 2.25 प्रतिशत राजस्थान सरकार के कृषि विभाग की ओर से नियत की गई है। आढ़तिया चार्जेज के रूप में आढ़त का भुगतान किया जाता है। इससे व्यापारिक फर्मों में एमएसपी पर किसान का गेहूं सरकार को देने के प्रति निराशा एवं हताशा है। उन्होंने मांग की कि अन्य जिन्सों पर आढ़त की भांति गेहूं पर सरकारी खरीद पर एफसीआई से राज्य सरकार की ओर से नियत आढ़त दर 2.25 प्रतिशत से व्यापारियों को भुगतान करवाया जाए। उक्त आढ़त दर 2.25 प्रतिशत दर से 54.56 रुपए प्रति क्विंटल मिलने से क वर्ग दलाल व्यापारी को 13.16 रुपए प्रति क्विंटल दर से हानि से बचाया जा सकेगा। टाउन मंडी से लगभग 13 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद एफसीआई की ओर से की जाती है। इस पर 1.71 करोड़ रुपए की आर्थिक हानि से मंडी को बचाया जा सकेगा। भविष्य में भी राज्य सरकार की ओर से निर्धारित आढ़त दर से आढ़त का भुगतान एफसीआई की ओर से किया जाए।


