गोदारा गैंग से जुड़ा था सागर:हत्या में जेल गया, 3 साल बाद जमानत मिली तो दूसरी हत्या की… फिर जमानत ली और फरार

अपराधी…दीपेंद्र सिंह उर्फ सागर (सीकर) गुनाह…हत्या के 2, हत्या के प्रयास के 14 केस। पुलिस को तलाश…क्योंकि हत्या में जेल गया। जमानत ली। दूसरी हत्या की और फर्जी जमानतदारों के पेश कर 5 दिन की जमानत ली…अब फरार। मामला रोहित गोदारा गैंग से जुड़े सागर का है। सागर ने 2019 में हरमाड़ा में महावीर मीणा की गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में दो साल बाद जमानत मिल गई। साल 2022 में करधनी में बिजेंद्र गुलाबाड़ी की हत्या कर दी। तीन साल बाद कोर्ट ने 5 दिन के लिए जमानत दी थी। 30 नवंबर को सागर जेल से बाहर निकला। 4 दिसंबर को उसे शाम 5 बजे तक जेल में आना था लेकिन फरार हो गया। जेल अधीक्षक भंवर सिंह इसकी रिपोर्ट कोर्ट को भेज दी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां राजस्थान समेत कई राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। याचिका में कहा था-भाई की शादी, घर में पुरुष नहीं…जमानत दी जाए सागर विदेश में बैठे गैंगस्टर रोहित गोदारा संपर्क था। इसकी पुष्टि सागर के दोस्त ओम सिंह से पूछताछ में हुई है। आईटीआई करने के बाद सागर मर्चेट नेवी में नौकरी करने लगा था। दो साल बाद नौकरी छोड़ी और शिवराज जुसरिया गैंग के साथ मिलकर करधनी में दिलीप सिंह व दशरथ सिंह पर फायरिंग की। परबतसर में शराब ठेके पर फायरिंग की। जयपुर जेल में जेलर से विवाद पर उसे अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल शिफ्ट किया गया। जमानत में सागर ने कहा कि घर में भाई की शादी है। घर में पुरुष नहीं इसलिए जमानत दी जाए। कोर्ट ने 5 दिन की जमानत दी थी। सत्यापन के लिए पुलिस घर पहुंची तो फर्जी जमानतदारों का खुलासा करधनी पुलिस ने सागर के पिता सुमेर सिंह व भाई रविन्द्र सिंह के बयान कोर्ट में भेजे थे। जबकि जमानत ऑर्डर में लिखा कि इसके घर में कोई अन्य पुरूष नही हैं, इसलिए 5 दिन की अंतरिम जमानत दी गई। इधर, सागर के फरार होने की सूचना पर पुलिस ने कोर्ट में पेश हुए जमानती का रिकॉर्ड खंगाला तो जमानती नाटाणियों का रास्ता कोतवाली निवासी रामेश्वर ठठेरा का पता फर्जी निकला। हाई सिक्योरिटी जेल से गोदारा गैंग से सोशल मीडिया के जरिए जुड़ा रहा जेल से ही सागर ने जनवरी में ओम सिंह को फोन किया। सागर ने दोस्त ओम सिंह को सिग्नल एप डाउनलोड करवाई और रोहित गोदारा से बात करने के लिए आईडी दी। सितंबर में गोदारा ने ओम से 25 लाख रुपए भी हवाला के जरिए भिजवाए थे। फिर ओम को 2 अक्टूबर को दुबई भेजा था। 6 दिन बाद लौट आया। ओम सिंह कुचामन के रमेश रूलानिया हत्याकांड में भी राडार पर था।

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