गोपालपुरा बाईपास महेश नगर स्थित कोचिंग सेंटर में बच्चे कैसे बेहोश हुए थे, 11 दिन बाद भी यह सवाल गुत्थी ही बना हुआ है। घटना को लेकर निगम तीन अलग-अलग थ्योरी सामने रख चुका है। तीनों ही सटीक नहीं बैठीं तो जांच ठंडे बस्ते में चली गई। हादसे के तुरंत बाद प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि बच्चे मिर्च के छौंक से बेहोश हुए थे, जबकि वहां किचन से ऐसा कुछ नहीं मिला। तब मीथेन गैस से बच्चों के बेहोश होने की बात सामने आई। टीम ने जांच की तो पता चला कि यहां पर मीथेन गैस जैसा कुछ नहीं है। जब निगम के उच्चाधिकारियों ने दोनों बातों को मानने से इनकार किया तो फिर से जांच को कहा गया। उसके बाद टीम फिर घटनास्थल पहुंची और पूरे सीन को दुबारा री-क्रिएट करने की बात हुई। निगम की ओर से आई टीम ने तीसरी नई थ्योरी पेपर स्प्रे को लेकर चर्चा शुरू की। इसके लिए पास की दुकान से पेपर स्प्रे खरीद कर मंगाया गया और उसका कमरे में छिड़काव किया। सभी को उसकी गंध का अहसास कराया और तय किया की या तो किसी छात्रा के बैग में पेपर स्प्रे फट गया या किसी शरारती छात्र ने ऐसा किया होगा। अब पूरे सीन को दुबारा से क्रिएट करने की चर्चा चल रही है। इसमें बच्चों को पहले की तरह ही क्लास में बैठाया जाएगा। उसी स्थान पर पेपर स्प्रे का छिड़काव कर गंध महसूस कराई जाएगी। हालांकि उच्चाधिकारियों ने इसकी परमिशन नहीं दी है। बता दें कि 15 दिसंबर की शाम को कोचिंग के करीब 10 छात्र किसी अनजानी गंध के चलते क्लास में बेहोश हो गए थे। घटना की जांच के लिए 5 सदस्य टीम बनी जांच दल में उपायुक्त मानसरोवर लक्ष्मीकांत कटारा, राजस्व अधिकारी मानसरोवर सुनील बैरवा, एटीपी सीमा माथुर, सीएसआई सुरेश जावा तथा अग्निशमन अधिकारी देवांग यादव शामिल थे। टीम दो बार कोचिंग भवन में गई। कोचिंग भवन में न तो मिथेन गैस का लीकेज सामने आया और ना ही एसी की गैस के रिसाव से हादसा होना बताया। जांच दल ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया है कि निगम से जुड़ी समस्या सामने नहीं आई है। यह जांच अब पुलिस का विषय है। इसके बाद निगम अफसरों ने कोचिंग प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में पेपर स्प्रे का डेमो दिया, ताकि कोचिंग व पुलिस प्रशासन ये मान ले कि घटना किसी भी गैस के लीकेज से नहीं हुई, बल्कि पेपर स्प्रे से हुई है और इसके लिए निगम प्रशासन जिम्मेदार नहीं है बल्कि कोचिंग प्रशासन है। कोचिंग में हुई घटना में नगर निगम की कोई खामी नहीं हम कोचिंग सेंटर में गए थे, जहां पर जांच करते हुए सामने आया कि निगम की कोई खामी नहीं है। हमने हमारी रिपोर्ट को उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। आगे की कार्रवाई उनके स्तर पर होगी।-लक्ष्मीकांत कटारा, मानसरोवर उपायुक्त


