जिंसी स्थित नगर निगम के स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि के बाद से हंगामा जारी है। मंगलवार को नगर निगम परिषद की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने भी कार्रवाई की मांग करते हुए इस्तीफे की घोषणा कर दी। इसी बीच, निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने आसंदी से व्यवस्था दी कि स्लॉटर हाउस को स्थायी रूप से बंद करने व गोमांस मिलने के मामले की शासन स्तर पर जांच कराई जाए। सूर्यवंशी ने बताया कि नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन के प्रस्ताव पर संभागायुक्त संजीव सिंह ने स्लॉटर हाउस में पशुओं का चेकअप करके काटने की अनुमति देने वाले पशु चिकित्सक डॉ. बेनी प्रसाद गौर को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, विपक्ष का हंगामा जारी रहा। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, गुड्डू चौहान और भाजपा के देवेंद्र भार्गव जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। स्लॉटर हाउस बंद करने की बात कहने के बाद महापौर ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि यदि स्लॉटर हाउस बंद हो रहा है तो पूरे शहर में अवैध स्लॉटरिंग भी बंद हो, बल्कि मांस खाने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। मुर्गी से लेकर भैंस तक अब कुछ नहीं कटना चाहिए। बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने मांग की कि इस मामले में एमआईसी को भी जांच के दायरे में लाया जाए। बात न बनने पर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया परिषद की बैठक के बाद देर रात स्लॉटर हाउस में काम करने वाले 8 नियमित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही 3 अस्थायी कर्मचारियों को नोटिस भेज दिए हैं। उन्हें काम पर आने से मना कर दिया है। इनके खिलाफ एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। विपक्ष के हंगामे के बाद शहर से जुड़े दो प्रस्ताव पेश 1. कॉलोनी के 70% लोगों की सहमति जरूरी
2. मेंटनेंस व बिजली का खर्चा सोसायटी के जिम्मे विपक्ष के हंगामे के बीच नगर निगम ने परिषद में दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। अब 829 कॉलोनियों के 74,905 परिवार बल्क की जगह निजी कनेक्शन ले सकेंगे। हालांकि, दो ऐसी शर्तें जोड़ दी हैं कि ये चाहकर भी कनेक्शन न ले सकें। जिस कॉलोनी के कम से कम 70% रहवासी लिखित सहमति देंगे, उसी कॉलोनी में निजी कनेक्शन दिए जाएंगे। यह कनेक्शन भी पहले आओ, पहले पाओ की तर्ज पर दिए जाएंगे। सवाल यह है कि बड़ी कॉलोनियों में इतने लोगों की सहमति कैसे जुटाएंगे? दूसरी बड़ी शर्त यह है कि निजी कनेक्शन मिलने के बाद भी नगर निगम कॉलोनी का पूर्ण हस्तांतरण नहीं लेगा। यानी कॉलोनी के अंदर की पाइपलाइन की मरम्मत, मोटर चलाने की बिजली, ऑपरेटर व लेबर का खर्च सब कुछ सोसायटी या रहवासियों को उठाना पड़ेगा। रहवासियों को निगम से लिखित अनुबंध करना होगा कि पानी की सप्लाई में दिक्कत आने पर निगम जिम्मेदार नहीं होगा। सभी कॉलोनियों में निजी कनेक्शन लिए गए तो नई पाइपलाइन, वाल्वमैन, ऑपरेटर और मेंटेनेंस पर करीब 801 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हर घर में स्मार्ट मीटर लगाने पर 72.73 करोड़ रुपए। (प्रति घर करीब 9,709 रु.) लागत आएगी। कुल लागत करीब 874.43 करोड़ रु. बैठेगी। बिलिंग के लिए निगम ने आउटसोर्सिंग का विकल्प खुला रखा है। एजेंसी या सोसायटी को निगम को 17 रुपए प्रति हजार लीटर की दर से भुगतान करना होगा। इसके अलावा मेंटेनेंस और अन्य खर्चों के नाम पर रहवासियों से अलग से पैसा वसूला जा सकेगा। दूसरा प्रस्ताव… सिर्फ ₹130 में विवाह पंजीयन


