17-18 दिसंबर की रात स्लॉटर हाउस के ट्रक से गोमांस पकड़े जाने के मामले में नगर निगम के साथ ही पुलिस की जांच भी बेहद धीमी गति से चल रही है। ट्रक में गोमांस की पुष्टि होने के बाद 24 दिसंबर को स्लॉटर हाउस संचालक असलम कुरैशी को गिरफ्तार किया गया। उसे जेल भी भेज दिया गया। लेकिन, 24 दिन में पुलिस यह तक पता नहीं लगा सकी है कि स्लॉटर हाउस में कटने के लिए इतनी बड़ी संख्या में गायें कहां से आ रही थीं। पुलिस का रवैया ऐसा कि उसने इस गंभीर प्रकरण में आरोपी की रिमांड तक नहीं मांगी। जबकि, मप्र में गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 के तहत ऐसे मामले में 7 साल की सजा का प्रावधान है। इतनी ढीली जांच तब, जब नगर निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, भाजपा विधायक और मंत्रियों के साथ ही कांग्रेस भी इस मुद्दे पर मुखर है। अहम बात ये कि निगम द्वारा पीपीपी मोड पर शुरू किए गए इस स्लॉटर हाउस के समझौते में लिखा है कि यहां केवल भैंस, भेड़ और बकरी का वध अनुमत है। गाय, बछड़ा, बछिया या किसी भी गोवंश का वध करार में शामिल नहीं है। इसके बाद भी निगम कमिश्नर या महापौर की तरफ से मामले में एफआईआर नहीं कराई गई है। सांसद बोले- मुझे नोटिस दिया, पर मैंने अनुमति नहीं दी घटना के 25 दिन बाद सांसद अलोक शर्मा ने भी गोवंश काटने पर आपत्ति जताई। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि जांच होनी जानी चाहिए कि किस अधिकारी ने स्लॉटर हाउस का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया, जिससे किसी एक खास वेंडर को लाभ पहुंचाया गया। संभागायुक्त से लेकर नगर निगम आयुक्त की भी भूमिका की जांच होनी चाहिए। शर्मा ने का कि जब मैं महापौर था, मेरे पास भी स्लॉटर हाउस खोलने के प्रस्ताव आए, नगरीय प्रशासन विभाग के एक बड़े अधिकारी ने तो मुझे महापौर पद से हटाने का नोटिस तक दे दिया था, लेकिन मैनें स्लॉटर हाउस की तब भी अनुमति नहीं दी थी। दरोगा और एएचओ उठा रहे मृत पशु असलम मृत पशु उठाने और उन्हें रेंडरिंग प्लांट या इंसिनरेटर में ले जाने का काम भी कर रहा था। उसकी कंपनी में ताला लगने के बाद पिछले तीन दिन से शहर में मृत पशु उठाने का काम दरोगा और एएचओ कर रहे हैं। इन्हें दफनाया जा रहा है। स्लॉटर हाउस के बाहर पुलिस तैनात स्लॉटर हाउस विवाद के बाद यहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। 24 घंटे यहां पुलिसकर्मी तैनात हैं, जो हर आने-जाने से पूछताछ कर रहे हैं। स्लॉटर हाउस के बाहर बड़ी संख्या में पॉलीथिन पड़ी हुईं हैं, जिनमें पैक होकर मांस बाहर भेजा जाता था। सीधी बात – रश्मि अग्रवाल दुबे, एडीसीपी जोन-1 असलम को कब जेल भेजा गया ? गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया था। कोर्ट में पुलिस ने रिमांड की मांग की थी? अभी जांच चल रही है। इसकी जानकारी नहीं दे सकते। स्लॉटर हाउस में गोवंश कहां से लाए जा रहे थे? एफआईआर के बाद जांच जारी है। जानकारी नहीं दे सकती। कांग्रेस की मांग, अफसरों पर केस हो कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा से मिलकर जिम्मेदार अफसरों पर एफआईआर की मांग की। शर्मा ने आरोप लगाया कि असलम के भाजपा में कनेक्शन हैं। वह नेता-अफसरों को मोटी रकम देता है। मैं जल्द इनकी बैंक डिटेल उजागर करूंगा।


