अमृतसर सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में आज (गुरुवार को) दरगाह अजमेर शरीफ से पहुंचे मुख्य सेवादार सैयद अकील अहमद चिश्ती ने माथा टेक कर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर उनके साथ लोक भलाई सोसाइटी के प्रमुख सेवादार सुरिंदर सिंह अरोड़ा, वीरजी गौरवदीप सिंह भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर गुरु घर में माथा टेका, कीर्तन श्रवण किया और सरबत के भले की अरदास की। सूचना केंद्र के सूचना अधिकारी अमृतपाल सिंह ने इस अवसर पर सैयद अकील अहमद चिश्ती का सम्मान किया। सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब आकर आत्मिक शांति का अनुभव होता है। उन्होंने इसे पूरी मानवता के लिए रूहानियत और भाईचारे का सबसे बड़ा केंद्र बताया। गोल्डन टेंपल इंसानियत को जोड़ने वाला केंद्र: सैयद अकील अहमद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सैयद अकील अहमद चिश्ती ने कहा कि श्री हरमंदिर साहिब में आकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक तृप्ति मिली है। उन्होंने कहा कि यह स्थान सिर्फ सिख समुदाय ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत को जोड़ने वाला केंद्र है। यहां आकर हर कोई अपने मन को शांति और सुकून प्रदान कर सकता है। पंजाब में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के हालातों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश के अन्नदाता पंजाब को इस प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान उठाना पड़ा है। खेत-खलिहान बर्बाद हुए हैं और हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। इस कठिन घड़ी में पूरे देश को मिलकर पंजाब के लोगों की मदद करनी चाहिए। इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं : चिश्ती उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब संकट के समय हमेशा एकजुट रहता है और आज यह देखकर खुशी होती है कि हर धर्म, हर समाज से जुड़े लोग बाढ़ पीड़ितों की सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने गुरु परंपरा और खालसा पंथ की उस परंपरा को भी नमन किया जिसमें सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। सैयद अकील अहमद चिश्ती ने आगे कहा कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। जब इंसान मुश्किल में हो तो उसकी मदद करना ही सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मुश्किल दौर से पंजाब जल्द बाहर निकलेगा और सरबत का भला होगा।


