गोल्डी बराड़ का नेटवर्क: छोटे अपराधियों को हथियार, पैसे का लालच दे तैयार करते थे गैंग

भास्कर न्यूज़ | लुधियाना लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट की तीन हफ्ते चली कार्रवाई में सामने आया है कि कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का नेटवर्क केवल हथियार सप्लाई या उगाही तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक संगठित भर्ती मॉडल पर काम कर रहा था। इस मॉडल के तहत गरीब और छोटे स्तर के अपराधियों को छोटे-छोटे टास्क देकर धीरे-धीरे गैंग का हिस्सा बनाया जाता था। अब तक की जांच में दो अलग-अलग एफआईआर के जरिए यह साफ हुआ है कि गोल्डी बराड़ विदेश में बैठकर अपने नेटवर्क को सीधे नहीं, बल्कि इंटरमीडिएट हैंडलर्स और लोकल ऑपरेटिव्स के जरिए चला रहा था। टास्क बेस्ड ऑपरेशन दिए जाते थे और गैंग के नाम का लालच देकर छोटे अपराधियों को जोड़ा जाता था। इन्हें खर्चा पानी भी दिया जाता था। अपराधियों को रंगदारी के लिए हथियार की सप्लाई अथवा शूटिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। सभी को टास्क दिए जाते थे, जो अलग-अलग होते थे। बन्दूक सप्लाई करने वाला व्यक्ति प्लॉट में बन्दूक छुपा देगा, उसी जगह से दूसरा व्यक्ति हथियार लेकर चला जाता था। अपराधी एक दूसरे से अनजान थे ताकि पकड़े जाने पर सिर्फ एक ही टीम पकड़ी जाए। दूसरी एफआईआर 12 दिसंबर 2025 को थाना डिवीजन नंबर 4 में दर्ज की गई। ये मामला सीधे संगठित अपराध गिरोह से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, गोल्डी बराड़ ने उगाही के लिए एक अलग नेटवर्क तैयार किया था। इस नेटवर्क में शामिल नाम गोल्डी बराड़, शुभम ग्रोवर, वरिंदर चरण, नरेश सेठी, मानव, विकास, राजेश उर्फ कन्नू, विक्रम, संदीप, राजन, जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सू, जतिन उर्फ सेम और जतिन कटारिया थे। इसमें वरिंदर चरण, विक्रम, संदीप और राजन के अलावा सभी अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं गोल्डी बराड़ कनाडा को लुधियाना में जल्द ही प्रोसीक्यूट किया जाएगा। जांच में सामने आया कि जब शुभम ग्रोवर को प्रोडक्शन वॉरंट पर लाया गया, तो उसने खुलासा किया कि नरेश सेठी तमिलनाडु का रहने वाला है। उसको लुधियाना में टीम तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। नरेश सेठी के जरिए इस नेटवर्क में लोकल युवाओं को जोड़ा गया। नरेश वरिंदर और गोल्डी बराड़ के टच में था। नरेश गुरुग्राम और अन्य जगहों के व्यापारियों को भी टारगेट कर फिरौती मांगता था। नरेश ने लुधियाना में भी 2 बार फायरिंग की हुई थी। उन्हें उगाही का टास्क दिया गया। अवैध हथियार उपलब्ध कराए गए। यह पूरा नेटवर्क एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए संपर्क में रहता था और हथियारों की डिलीवरी के लिए पिक-एंड-ड्रॉप सिस्टम अपनाया जाता था, ताकि पुलिस ट्रैक न कर सके। बाकी सभी अपराधी नरेश का नरेश के साथ जेल कांटेक्ट बनता गया और नरेश ने बाकी अपराधियों को अपने गिरोह में शामिल कर लिया। 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए- पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में शामिल ज्यादातर आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से थे। पहले से छोटे-मोटे अपराधों में शामिल थे। उन्हें पैसे, हथियार, गैंगस्टर नेटवर्क का डर और नाम का लालच देकर जोड़ा गया। पहले छोटे टास्क, फिर बड़े अपराध, यही इस गिरोह का पैटर्न था। लुधियाना पुलिस ने अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनमें 12 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए जिनमें 2 ऑस्ट्रियन ग्लॉक पिस्टल शामिल हैं। इन हथियारों को क्रॉस बॉर्डर से यहां लाया गया जिसकी भी जांच चल रही है। लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने बताया कि पुलिस ने क्राइम ब्रांच और जोनल अधिकारियों की स्पेशल टीमें बनाकर इस नेटवर्क पर कार्रवाई की।

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