गोस्सनर कलीसिया ने 169वां ऐतिहासिक ख्रीस्तान डेरा महोत्सव मनाया, प्रभु भोज हुआ

सिटी रिपोर्टर | रांची गोस्सनर एवंजेलिकल लूथेरान कलीसिया छोटानागपुर और असम ने रविवार को 169 वां ऐतिहासिक ख्रीस्तान डेरा महोत्सव मनाया। इस अवसर पर डुमरगड़ी के बिलसेरेंग में आयोजित महोत्सव में हजारों की संख्या में विश्वासी शामिल हुए और अपने पूर्वजों को याद किया। मुख्य अतिथि कलीसिया महिला संघ की सचिव शशिरिता कंडुलना रही। उन्होंने अपने उपदेश में मानवता और सेवा को सर्वोपरि बताया। कहा कि मानवता का सबसे बड़ा चिह्न सेवा है। साथ ही विश्वास पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो कोई परमेश्वर पर विश्वास करता है परमेश्वर उसे हजारों पापियों के बीच से भी बचा लेता है। प्रभु की नजर हर पल हम पर होती है और वे हमारी प्रार्थनाओं को सुनते हैं। मौके पर सिमडेगा विधायक बिक्सल कोंगारी, तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया, खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की सहित जीईएल चर्च मॉडरेटर रेव्ह. मार्शल केरकेट्टा, डिप्टी मॉडरेटर रेव्ह. मुरेल बिलुंग सहित अन्य मौजूद थे। सुबह 8.30 बजे से ही लोग बिलसेंरेग पहुंचने लगे थे। पंजीकरण शुरू हो गया था। 9 बजे सभी मुख्य वेदी के पास जमा हुए। प्रार्थना एवं जल-पवित्रीकरण रेव्ह. मंगल टुटी ने किया। आशीर्वाद वचन मॉडरेटर मार्शल केरकेट्टा ने दिया। इसके बाद विश्वासी दूसरी वेदी की ओर बढ़े, यहां वेदी पर पवित्र जल का छिड़काव डिप्टी मॉडरेटर मुरेल बिलुंग ने किया। ख्रीस्तान डेरा महोत्सव छोटानागपुर की प्रथम मसीही कलीसिया गोस्सनर कलीसिया के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है । डुमरगड़ी, बिलसेरेंग वह ऐतिहासिक शरणस्थान है, जहां 1857 के सिपाही विद्रोह के दौरान गोस्सनर कलीसिया के विश्वासी पूर्वजों ने रांची से पलायन कर शरण ली थी। पूर्वजों ने बेथेसदा आवासीय विद्यालय, रांची के लगभग 120 स्कूली बच्चों के साथ पश्चिम कारो नदी के टापुनुमा जंगल में करीब डेढ़ माह तक छिपकर जीवन बिताया।

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