प्रदेश में दर्ज हो रहे गोहत्या के मामलों में ढिलाई बरती जा रही है। तीन साल में गोहत्या के दर्ज प्रकरणों में आधे से ज्यादा मामलों में आरोपियों को सजा नहीं हुई। प्रदेश में वर्ष 2023 से अगस्त 2025 तक गोहत्या के 202 मामले पुलिस थानों में दर्ज हुए हैं, जिनमें से केवल 69 आरोपियों को ही सजा मिल पाई। पुलिस की ओर से 105 चालान पेश किए गए। वहीं पुलिस जांच में 33 प्रतिशत मामले झूठे पाए जाने पर 51 केस में एफआर लगा दी गई। अभी तक 46 केस पेंडिंग हैं। 2023 में 89 और 2024 में 77 मामले “गोमाता के नाम पर योजनाएं चलाई जा रही हैं। करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। जब वास्तविक सम्मान और पहचान देने की बात आती है तो सरकार टालमटोल करती है। गोमाता के सम्मान में सरकार पीछे क्यों हट रही है?” -यूनुस खान, विधायक, डीडवाना “गोहत्या के मामले संज्ञान में आते ही तुरंत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के निर्देश दे रखे हैं। संबंधित विभाग को पत्र लिखकर दर्ज प्रकरणों में कार्रवाई करवाई जाएगी।” -जोराराम कुमावत, गोपालन व देवस्थान मंत्री, राजस्थान सरकार


