छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध ज्वालेश्वर महादेव मंदिर और अमरकंटक के नर्मदा उद्गम मंदिर में आज महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे। ज्वालेश्वर महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है। यहां भक्तगण भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते नजर आए। यह मंदिर गौरेला अमरकंटक मार्ग से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्रद्धालुओं का लगा तांता अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भक्त नर्मदा उद्गम से जल लाकर भगवान शिव को अर्पित कर रहे हैं। हर साल महाशिवरात्रि पर मां नर्मदा की उदगम स्थली पर स्थित जलेश्वर और अमरेश्वर महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। सुबह से ही दोनों मंदिरों में भक्तों की उमड़ती भीड़ देखी जा रही है। मंदिर से जुड़ी मान्यता ज्वालेश्वर महादेव के संबंध में मान्यता है कि पिनाक धनुष से बाणासुर का वध करने के बाद महादेव ज्वाला के रूप में मैकाल पर्वत पर इसी स्थान पर प्रकट हुए। ये ज्वाला आगे चलकर शिवलिंग के रूप में परिवर्तित हो गई। ज्वालेश्वर शिवलिंग के ठीक नीचे से ही जोहिला नदी का उद्गम भी है। पुराने समय में इस स्थान को महा रूद्र मेर कहा जाता था। स्कंद पुराण में मान्यता है कि ज्वालेश्वर शिवलिंग पर दूध और शीतल जल अर्पित करने से पुण्य मिलता हैं।


