छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी के मार्गदर्शन में तीन दिवसीय इन्फ्लुएंसर मीट का आयोजन किया गया। पहले दिन पर्यटन विशेषज्ञों ने बिल्लमगढ़ की प्राकृतिक गुफाओं का भ्रमण किया। राजमेरगढ़ में कैंपिंग साइट पर सूर्यास्त का नजारा देखा। साथ ही डूमरपानी, जामुनपानी, तिपान, जोहिला और अमरावती-गंगा नदियों के उद्गम स्थल का दौरा किया। इसके साथ ही बैगा आदिवासियों से मुलाकात की और दुर्लभ पक्षियों के बारे में जानकर खुश हुए। बैगा जनजाति की जीवनशैली की जानकारी ली दूसरे दिन विशेषज्ञों ने बैगा बाहुल्य क्षेत्र केंवची और बानघाट का भ्रमण किया। यहां के वैद्यों से मुलाकात की और बैगा जनजाति की जीवनशैली को करीब से देखा। लमना में स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखा। पूटा में ग्रामीण हाट और चांद-सूरज मंदिर का दौरा किया। रात में स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गौरा गौरी और शैला नृत्य का आनंद लिया। पुरातात्विक स्थलों का दौरा अंतिम दिन झोझा जलप्रपात और जोगी गुफा का भ्रमण किया गया। परेवा पाट सेमरदर्री में दूधराज पक्षी के दर्शन हुए। यहां यह पक्षी प्रेत चिरई और दुलहा चिरई के नाम से जाना जाता है। समुदलई के प्राकृतिक कुंड, करगीकला में सोननदी किनारे गूलर पानी कुंड, गगनई डेम और धनपुर के पुरातात्विक स्थलों का भी दौरा किया गया। सम्मेलन में आए अतिथि यहां की जैवविविधता दुर्लभ ऑरेंज ओक लीफ तितली, मैपविंग तितली, दूधराज पक्षी और बंबू पिट वाइपर से विशेष रूप से प्रभावित हुए। सम्मेलन में आए अतिथियों में बस्तर ट्राइबल होम स्टे के संचालक शकील रिज़वी, केशकाल स्थित रूरल यात्रा और टाटामारी इकोटूरिज़्म के संचालक रिजवान खान, सोलो ट्रेवलर एवं राइटर स्मिता अखिलेश शामिल रहे। वहीं, सरीसृप विशेषज्ञ विवेक शर्मा, आकाशवाणी बिलासपुर से डॉ. सुप्रिया, मैं जुहिला पुस्तक के चर्चित लेखक प्रतिभू बनर्जी, स्केच आर्टिस्ट अद्वैत भारत, बिलासपुर रेलवे ज़ोन के प्रबंधक एस भारतीयन, नित्या पर्यटन समिति के संचालक प्रदीप सिंह बघेल, सेलिब्रिटी इवेंट मैनेजर सुचित सिंह एवं डाक्यूमेंट्री फिल्ममेकर कृतार्थ चतुर्वेदी शामिल थे।


