झालावाड़ में इन दिनों शीतलहर का प्रकोप जारी है, जिससे न केवल जनजीवन बल्कि मूक पशु भी प्रभावित हो रहे हैं। इस कड़ाके की ठंड से गोवंश को बचाने के लिए स्थानीय लोग अनूठे तरीके अपना रहे हैं। श्री कृष्ण गौशाला सहित शहर की अन्य गौशालाओं में गोवंश को तेज ठंड से बचाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। गौशालाओं में गोवंश के चारों ओर ग्रीन नेट लगाकर उनके रहने के स्थान को पूरी तरह से कवर किया गया है, जिससे ठंडी हवा का प्रवेश रोका जा सके। अकलेरा क्षेत्र के गांव उमरिया स्थित श्री गणेश गौशाला में एक अनोखी पहल की गई है। यहां कच्ची पत्थर की दीवारों में मौजूद दरारों को गोबर से लीपा गया है। गौशाला के व्यवस्थापक बनेसिंह (भूतपूर्व सैनिक) और अन्य कार्यकर्ताओं के अनुसार, गोबर की खासियत है कि इसमें सर्दी के मौसम में भी गर्मी बनी रहती है, जो पशुओं को ठंड से बचाने में मददगार साबित हो रही है। मौसम की बात करें तो सुबह का समय विशेष रूप से कठिन होता है। कोहरे के कारण ठंड का प्रकोप अधिक रहता है। हालांकि सुबह 8 बजे के बाद हल्की धूप निकलती है, लेकिन फिर भी शीतलहर का असर बना रहता है। सुबह के समय ओस की बूंदें इतनी अधिक होती हैं कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे रात में हल्की वर्षा हुई हो।


