कोटा नगर निगम के अधीन आने वाली बंधा धर्मपुरा गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश रखे जा रहे है। स्थिति यह है कि शहर से गौवंश पकड़कर लाए भी जा रहे हैं लेकिन शहर में गौवंशों का आंतक भी कम नहीं हो रहा और गौशाला में इन्हें रखने को जगह भी कम पड़ रही है। ऐसे में उनकी देखभाल भी ठीक तरह से नहीं हो पा रही। हालांकि गौशाला के लिए नई जमीन का काम चल रहा है। जमीन अलॉट हो चुकी है। गौशाला समिति के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि शहर में गायों को पकड़कर कायन हाउस में रखा जाता है। बाद में वहां से गायों को बंधा धर्मपुरा गौशाला में शिफ्ट किया जाता है। इस गौशाला की कैपेसिटी 11 सौ गौवंशों की है जिन्हें खींचकर 16 से 17 सौ तक को भी रख सकते है। लेकिन वर्तमान में दो हजार से ज्यादा गौवंश यहां रह रहे हैं। ऐसे में गौवंशो को तो दिक्कत होती ही है उनकी देखभाल में स्टाफ को भी परेशानी आती है। शहर से मवेशी पकड़कर लगातार गौशालाओं में पहुंचाए जा रहे हैं ऐसे में इन्हें रखने के लिए जगह नहीं बच रही। उन्होंने कहा कि गौशाला के पास 26 बीघा जमीन है, इस जमीन में गौशाला के विस्तार का काम किया जाएगा। वर्तमान में गौवंशों को किशोरपुरा गौशाला में रखा जा रहा है, यहां बीमार गायों का इलाज कर रहे हैं। दो दिन से नहीं उठ रहे मवेशी
कोटा में जगह-जगह मवेशियों के झुंड आसानी से नजर आ जाते हैं। कैटल फ्री शहर बनाने के लिए यहां देवनारायण आवासीय योजना भी विकसित की गई लेकिन उसके बाद भी शहर की सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा रहता है। निगम का दावा तो है कि गौवंशों को पकड़कर निगम की गौशाला के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों की गौशाला में भी भेज रहे हैं लेकिन इसके बाद भी शहर में गौवंशों के हमले में लोग घाायल हो रहे हैं। इधर, गौशाला में मृत गौवंश भी पिछले दो तीन दिन से नहीं उठ रहे हैं।


