बूंदी के केशोरायपाटन इलाके में दो बिजली ग्रिड के निजीकरण को लेकर बुधवार दोपहर बाद को ग्रामीण लामबंद हुए हैं। ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए निजीकरण का विरोध जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि जीएसएस के निजीकरण से 25 से अधिक गांवों की बिजली सप्लाई पर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने सीएम को पत्र लिखकर विरोध प्रकट किया है और निजीकरण रोकने की मांग की है। केशोरायपाटन क्षेत्र के दो जीएसएस के निजीकरण की चर्चा के बीच ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। माधोराजपुरा जीएसएस जुड़े गांवों के ग्रामीणों ने निजीकरण की प्रक्रिया का विरोध किया है।इसको लेकर चामुंडा माताजी परिसर में 15 गांवों के ग्रामीण एकत्र हुए और निजीकरण रोकने और ऐसे किसी भी निर्णय को लेने से पहले ग्रामीणों की सहमति लेने की मांग रखी। ग्रामीणों कहना है कि बिना लोगों की सहमति और जानकारी के किसी भी सार्वजनिक सेवा का निजीकरण करना उचित नहीं है। विरोध में ग्रामीणों ने सीएम के नाम ज्ञापन केशोरायपाटन एसडीएम को दिया। मौके पर मौजूद विधायक सीएल प्रेमी को भी इस बात से अवगत करवाया है। बैठक को संबोधित कर रहे नवीन श्रृंगी ने बताया कि ऐसी जानकारी मे आया है कि सरकार माधोराजपुरा व चितावा जीएसएस को निजी हाथों में दे रही है। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि इसके बाद उन्हें निर्बाध रूप से बिजली कि सप्लाई मिलने में समस्या आ सकती है। वहीं, निजीकरण के बाद ग्रामीणों को अतिरिक्त व्यय भार भी झेलना पड़ सकता है। इसके चलते ग्रामीणों की मांग है कि निजीकरण की प्रक्रिया से पहले ग्रामीणों के बीच चर्चा होनी चाहिए और बाद की स्थिति मे उपभोक्ताओं के हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी समीक्षा की जाए ताकि ग्रामीणों की आशंका का समाधान हो सके। कंटेट : ओमपाल सिंह


