झालावाड़ हादसे के बाद प्रदेश के कई सरकारी स्कूल भवनों को बंद करके स्कूलों को अन्य परिसर में शिफ्ट कर दिया गया। बीकानेर के अर्जनसर स्थित महात्मा गांधी स्कूल को भी दूसरे परिसर में शिफ्ट किया। ऐसे स्कूल को दो शिफ्ट में चलाना पड़ा। ग्रामीणों को ये बात अखरी और जन सहयोग करके स्कूल को फिर से तैयार कर दिया। कुछ रुपए सरकारी सहयोग से लगे तो कुछ स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर व्यवस्थाएं कर दी। अब स्कूल में न सिर्फ मरम्मत हो गई है, बल्कि सीसीटीवी कैमरों के साथ रंग रोगन भी हो गया है। दरअसल, स्कूल भवनों की हुई जांच में अर्जुनसर के महात्मा गांधी विद्यालय को भी असुरक्षित और जर्जर मानते हुए 11 सितंबर 2025 को इस भवन को स्कूल संचालन हेतु अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसी के साथ कस्बे की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के भवन में महात्मा गांधी स्कूल को दूसरी पारी में लगाने के आदेश जारी कर दिए गए थे। इस नई व्यवस्था में आसपास के गांव, चक, ढाणियों के न केवल बच्चे बल्कि उनके अभिभावक भी असहज हो गए। एक ही घर से जाने वाले दो बच्चों को अलग-अलग समय पर अलग-अलग वाहनों से भेजने की यह मजबूरी आर्थिक रूप से भी बोझ साबित हुई। शुरुआती दौर में सिर्फ महात्मा गांधी स्कूल के विद्यार्थी ही प्रभावित हो रहे थे लेकिन सर्दी की शुरुआत होने के साथ ही दोनों ही स्कूलों के विद्यार्थी और शिक्षक तक इस व्यवस्था में प्रताड़ित होने लग गए। सर्दियों के में जहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुबह 7:00 बजे ठंड में शुरू हो रहा है वही महात्मा गांधी विद्यालय के बच्चे शाम को छह बजे के बाद ठंड और अंधेरे में आसपास के गांव को जाने में भारी परेशानी का सामना करने लग गए। शहरी क्षेत्र में चलने वाली इस दो पारी की व्यवस्था को ग्रामीण एरिया में प्रतिकूल बताते हुए पूर्व उपप्रधान शिवरतन शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीण एवं जन प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर सहित शिक्षा विभाग को अपनी पीड़ा से अवगत करवाया। शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ने स्वयं मौका देखा तथा लोगों की बात को उचित व जायज मानते हुए भवन की मरम्मत के निर्देश दिए। ग्राम पंचायत एवं जन सहयोग से लोगों ने महात्मा गांधी स्कूल के भवन की जरूरी मरम्मत करते हुए रंग रोगन भी नया करवा दिया। इसके साथ ही स्कूल में पानी, लाइट और सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था कर दी है। विभागीय तकनीकी जांच एवं ग्राम पंचायत के द्वारा भवन सुरक्षित होने की रिपोर्ट के बाद यह व्यवस्था पूर्ववत किए जाने के प्रस्ताव निदेशालय में स्वीकृति के लिए भिजवाए गए थे। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने बुधवार को संचालन की पूर्व व्यवस्था को लागू करने की स्वीकृति संयुक्त निदेशक को जारी कर दी गई हैं।
इस आदेश पर कस्बे के लोगों ने खुशी जताते हुए विभाग को धन्यवाद दिया है। बदलाव के लिए पूर्व उपप्रधान पतराम गोदारा, हनुमान जसू, बाबूलाल खंडेलवाल, लक्ष्मीनारायण ओझा, विक्रम सिंह, जगदीश थालौड़, गणेश रांकावत, उम्मेदसिंह राठौड़, पूर्णाराम सारस्वत आदि का भी लोगों ने आभार जताया है। पूर्व उप प्रधान शिवरतन शर्मा ने बताया कि बच्चों एवं ग्रामीणों के लिए असुविधाजनक साबित हुई दो पारी की व्यवस्था को पुनः यथावत करने पर शिक्षा विभाग एवं सहयोगी रहे सभी अधिकारियों का साधुवाद व्यक्त करते हैं।


