दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के हर्रई गांव में ग्रामीणों ने वन विभाग पर उनके घर गिराने की धमकी देने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वन भूमि से हटाया जा रहा है। इस मामले को लेकर रविवार शाम पूर्व विधायक प्रताप सिंह गांव पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्या बताई। वहीं, डीएफओ ईश्वर जरांडे ने इन आरोपों को गलत बताया है। ग्रामीण बोले-कई पीढ़ियों से यहां रह रहे डीएफओ जरांडे ने कहा कि गांव के लोग वन भूमि पर काबिज हैं, लेकिन उन्हें हटाने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार कई पीढ़ियों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह जमीन वन विभाग की है, तो सरकार ने यहां प्रधानमंत्री आवास और इंदिरा आवास कैसे स्वीकृत किए, जिनमें से कई निर्माणाधीन भी हैं। हर्रई गांव तेंदूखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत चंदना के अंतर्गत आता है। पूर्व विधायक बोले-जमीन को राजस्व भूमि में बदलने की करेंगे मांग ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रताप सिंह ने गांव में बैठक की और लोगों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सदियों से यहां बसे हुए हैं, इसलिए इस जमीन को राजस्व भूमि में बदलना प्रशासन की जिम्मेदारी है। पूर्व विधायक ने बताया कि इस संबंध में पंचायत द्वारा एक प्रस्ताव पारित कराया जाएगा। इसके बाद कलेक्टर से औपचारिक कार्रवाई की मांग की जाएगी ताकि यदि यह वन भूमि है और लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं, तो इसे आबादी क्षेत्र घोषित किया जा सके। डीएफओ बोले- ग्रामीणों के आरोप गलत दमोह डीएफओ ईश्वर जरांडे ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा जो मकान गिराने की बात कही जा रही है वह गलत है। यह बात सही है कि हर्रई गांव वनभूमि में बसा है, लेकिन ऐसा कोई आदेश नहीं किया गया कि ग्रामीणों को वहां से हटाया जाएगा। उन्होंने कहा वहां पर पीएम आवास स्वीकृत नहीं हो रहे हैं और ग्रामीण चाहते हैं कि पीएम आवास स्वीकृत हो जाएं। इसलिए दबाव बनाने के लिए इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं। कलेक्टर की जांच में भी यह बात सामने आई है कि जो लोग रह रहे हैं वह वन भूमि में रह रहे हैं इसलिए वहां पीएम आवास स्वीकृत होना संभव नहीं है। उन्होंने रेंजर से भी कहा है कि गांव जाकर ग्रामीणों से बात करें और उन्हें आश्वस्त करें कि इस प्रकार का कोई आदेश वन विभाग ने नहीं दिया कि किसी भी ग्रामीण का घर गिराया जाएगा। वन भूमि को आबादी घोषित करना यह सरकार के हाथ में है।


