13 बस्तियों के हिन्दू सम्मेलन में एक लाख लोग:देवास में पंच परिवर्तन पर जोर; हनुमान चालीषा पाठ, गो-शस्त्र पूजन किया

देवास में रविवार को सनातन संस्कृति के संरक्षण और राष्ट्र सुरक्षा में समाज की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए गए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में हुए इन सम्मेलनों में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए। ये आयोजन देवास नगर की 13 बस्तियों, सोनकच्छ और हाटपीपल्या नगर सहित कुल 11 मंडलों में हुए। देवास नगर में बीएनपी बस्ती, प्रताप बस्ती, बिलावली बस्ती, उत्तम नगर, राजाराम नगर, विकास नगर, अमोना, बावडिया, बालगड, मल्हार, उपासना, भवानी सागर और रेवाबाग बस्तियों में हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए गए। इसी तरह, सोनकच्छ और हाटपीपल्या नगर में भी बस्ती हिन्दू सम्मेलन हुए।ग्रामीण अंचल में पिपलरावा खंड के गंधर्वपुरी, गड़खजुरिया एवं तालोद मंडल; टोंकखुर्द खंड के पाडल्या, गौरवा एवं बुदासा मंडल; देवास ग्रामीण खंड के रालामंडल, नेवरी एवं सिंगावदा; तथा बरोठा खंड के क्षिप्रा एवं सिरोल्या मंडल में भी रविवार को हिन्दू सम्मेलन हुए। 11 मंडलों के 90 से ज्यादा गांव के लोग पहुंचे
इन 11 मंडलों के सम्मेलनों में 90 से अधिक गांवों के लोगों ने भाग लिया। इन सम्मेलनों में भारत माता पूजन एवं आरती, गो पूजन, शास्त्र पूजन, कलश यात्राएं, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और भजन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, गणेश-सरस्वती वंदना पर नृत्य और ‘पंच परिवर्तन’ सहित समसामयिक विषयों पर नाटिका जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।इस अवसर पर सभी स्थानों पर समरसता सहभोज का भी आयोजन किया गया। स्थानीय स्तर पर प्रमुख संत, मातृ शक्तियां, समाजसेवी और बुद्धिजीवी वक्ताओं के रूप में उपस्थित रहे।वक्ताओं ने हिन्दू समाज से अपनी सनातन परंपराओं, मूल्यों और संगठन शक्ति के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना और राष्ट्रहित में सामूहिक योगदान देना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। वक्ताओं ने ‘पंच परिवर्तन से समाज परिवर्तन’ के सूत्र को रेखांकित करते हुए बताया कि व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव ही समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि “हिन्दू हम सब एक” की एकता का यही भाव भारत को विश्व गुरु बनाएगा। संत-महात्माओं ने भी बलपूर्वक कहा कि हिन्दू समाज की एकजुटता ही विश्व कल्याण का सबसे सशक्त मार्ग है।

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