राज्य के जनजातीय इलाकों में ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने स्थानीय संसाधनों के आधार पर कौशल विकास होगा। इसके लिए गांवों का क्लस्टर बना कर विकास का मॉडल विकसित किया जा रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सांसद संकुल विकास प्रोजेक्ट की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि परियोजना के जरिए जनजातीय विकास को गति देने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त होंगे। जनजातीय क्षेत्रों से पलायन पर रोकने के लिए लोगों का कौशल विकास कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने की पहल हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति में एससी-एसटी उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान हैं। जनप्रतिनिधि और विकास सहयोगी इन क्षेत्रों में नई उद्योग नीति का लाभ दिलाएं। छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ मत्स्य पालन, बकरी पालन, गौ पालन, शूकर पालन से ग्रामीणों को जोड़ कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। जनजातीय लोग महुआ, इमली, चिरौंजी जैसे वनोपज का पुश्तैनी तौर-तरीकों से उत्पादन करते हैं। इसे वैल्यू एडिशन कर बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस दौरान लैलूंगा (रायगढ़), परशुरामपुर (सरगुजा), बकावंड (बस्तर), माता राजमोहिनी देवी (बलरामपुर) और धनोरा (केशकाल) संकुल में काम की समीक्षा हुई। अफसर संकुल से जुड़े गांवों तेजी से काम करें : नेताम कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि अधिकारी संकुल से जुड़े जनजातीय गांवों के विकास में तत्परता से काम करें ताकि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो। भाजपा के राष्ट्रीय संगठक वी. सतीश ने कहा कि गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के जनजातीय क्षेत्रों में ग्रामीण, एनजीओ, जनप्रतिनिधि और सरकार की सहभागिता से यह प्रोजेक्ट चल रहा है। बैठक में सांसद भोजराज नाग व चिंतामणि महाराज और विधायक रेणुका सिंह व गोमती साय मौजूद रहीं।


