कोडरमा का तिलैया डैम वैसे तो अपनी खूबसूरती को लेकर काफी प्रसिद्ध है। अब यहां फ्लोटिंग सोलर प्लांट लग जाने के बाद इसकी प्रसिद्धि और बढ़ जाएगी। टीपीएस द्वारा तिलैया डैम में 155 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पैनल स्थापित किया जाना है। इसकी तैयारी जोरों पर है।
केटीपीएस के एचओपी सह मुख्य अभियंता मनोज ठाकुर ने बताया कि केटीपीएस द्वारा कोडरमा में सोलर एनर्जी के रूप में कुल 171 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाना है। इसमें 10 मेगावाट बिजली का उत्पादन केटीपीएस के अंदर किया जा रहा है। जबकि 6 मेगावाट बिजली का उत्पादन केटीपीएस के अंदर स्थित तालाब में फ्लोटिंग सोलर प्लांट के जरिए जनवरी माह से शुरू हो जाएगा। वहीं, तिलैया डैम में 155 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्लांट का कार्य जल्द ही प्रारंभ होने वाला है। जिसे डीवीसी व एनटीपीसी के संयुक्त तत्वाधान में ग्रीन वैली कॉरपोरेशन के रूप में विकसित किया जाना है। उन्होंने बताया कि यह झारखण्ड का सबसे बड़ा सोलर प्लांट होगा। बिजली उत्पादन का कार्य भी हो चुका है प्रारंभ केटीपीएस में अभी हाल ही में 800 मेगावाट की दो यूनिट लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पर तकरीबन 15 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। विस्तारीकरण का काम पूरा होने के बाद सबसे ज्यादा बिजली उत्पादित करने वाला यह देश का पहला पावर प्लांट होगा। मछली पालन पर नहीं होगा कोई असर इधर, एचओपी मनोज ठाकुर ने बताया कि फ्लोटिंग सोलर प्लांट बनने की खबर से मछुआरों में संसय है कि कहीं उन्हें मछली पालन में कोई परेशानी न हो जाए। इस पर उन्होंने बताया कि मछुवारों को इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इससे उनके मछली पालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। काफी फायदेमंद होगा फ्लोटिंग सोलर प्लांट इधर, केटीपीएस के अंदर स्थित तालाब में इस सोलर प्लांट को इंस्टाल कर रही कंपनी के साइट इंचार्ज प्रिंस तिवारी ने बताया कि इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट का काम जुलाई 2024 से शुरू किया गया है, जिसे जनवरी 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फ्लोटिंग सोलर प्लांट कई मायनों में फायदेमंद है। फ्लोटिंग सोलर प्लांट से जहां एक ओर देश ग्रीन रिवॉल्यूशन की ओर बढ़ रहा है। वहीं इसके पानी के सतह पर लगने से पानी दूषित होने से बचता है तथा तालाबों में रहने वाले जीव जंतु भी सुरक्षित रहते हैं।


