भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर व्यापक तैयारियां जारी हैं। इसी क्रम में गुरुवार को जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों की संयुक्त कार्यशाला “इंदौर संवाद” का आयोजन रेसीडेंसी के सभागार में किया गया। इस कार्यशाला में उद्योगपतियों को आमंत्रित करते हुए उनसे आग्रह किया गया कि, वे बड़ी संख्या में समिट में शामिल हों और अधिक से अधिक निवेश करें। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। यहां बेहतर सुविधाएं और संसाधन मौजूद हैं। मंत्री बोले- MP में निवेश के लिए अच्छा वातावरण कार्यशाला में जल संसाधन मंत्री सिलावट ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प विकसित भारत-विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशन में तेजी से मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में तेजी से औद्योगिक विकास हो रहा है। निवेश के लिए अच्छा वातावरण है। उन्होंने उद्योगपतियों से आग्रह किया कि, वे इन्वेस्ट समिट में भाग ले और अधिक से अधिक निवेश करें। राज्य शासन द्वारा उन्हें सभी तरह की मदद दी जाएगी। उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा इन्वेस्टर्स समिट औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने का बेहतर प्रयास है। समय के अनुसार आईटी, माइक्रो चिप, एआई को भी बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिए एक अलग से भी समिट आयोजित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि, निवेशकों को हर तरह के मार्गदर्शन देने के लिए परामर्शदाता और सिंगल विडो की व्यवस्था को और अधिक कारगर बनाया जा सकता है। ‘किसानों को 4 गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए’ बैठक में महापौर ने जमीन अधिग्रहण मामले में साफ कहा कि, इतनी योजनाएं आ रही है और किसानों से जमीन ली जा रही है, लेकिन हम किसानों को चार गुना मुआवजा नहीं दे रहे हैं। जबकि केंद्र का जमीन अधिग्रहण नियम इसके प्रावधान करता है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि, लैंड पूल स्कीम में हम जमीन ले रहे हैं और उन्हें इसके बदले में 50 फीसदी विकसित प्लॉट दिए जाते हैं। महापौर ने कहा कि, लैंड पूल स्कीम में प्लॉट कहां मिलेंगे, इसका झगड़ चलता है, यह हम आईडीए और नगर निगम में देख ही रहे हैं कि, कितनी समस्या है, किसी को आगे प्लॉट तो कहीं किसी को कोने का प्लॉट तो कहीं किसी को पीछे प्लॉट दिया जाता है। इससे विवाद होता है। किसान दुखी नहीं होना चाहिए और जमीन दे रहा है तो चार गुना मुआवजा दिया जाना चाहिए। केंद्र की स्कीम में मिले यह मुआवजा
महापौर ने कहा कि, विकास जरूरी है, हो भी रहा है। जहां अधिग्रहण हो रहा है, मेरा मानना है कि, भू अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा देंगे तो अधिग्रहण जल्द होगा और प्रोजेक्ट भी जल्द पूरा होगा। केंद्र सरकार ने देश भर में मुआवजे के लिए चार गुना देने का काम किया है। मप्र में हर बार यह मांग उठी है कि, केंद्र की योजनाओं में यह फॉर्मूला लगे तो किसानों को, जिनकी जमीन जा रही है, चार गुना मुआवजा मिल सकता है। वह मन से दुखी नहीं होगा और ठगा महसूस नहीं करेगा। यदि प्लॉट देने की हमारी योजना है तो वह उन्हें जल्द मिल जाए। यह किसान, जमीन मालिक के हित का सुझाव है। कलेक्टर बोले- इंदौर में निवेश के लिए अपार संभावनाएं कलेक्टर आशीष सिंह ने उद्योगपतियों से कहा कि, इंदौर में निवेश के लिए अपार संभावनाएं है। अनुकूल वातावरण है। इंदौर में अधिक से अधिक निवेश किया जाए। उन्होंने क्षेत्रीय विकास और निवेश योजना (मेट्रोपॉलिटन एरिया) के संबंध में भी जानकारी दी और सुझाव भी लिये। उन्होंने कहा कि, यह योजना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री की मंशा है कि इंदौर और उज्जैन संभाग को मिलाकर सुव्यवस्थित और समग्र विकास की योजना तैयार हो। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश में विभिन्न आर्थिक मापदंडों, सड़क और वायुमार्ग की कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक हब, प्रस्तावित कॉरिडोर, मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल इको-सिस्टम, पिछले एक वर्ष की उपलब्धियां, इंदौर के औद्योगिक परिदृश्य, इंदौर में उपलब्ध सुविधाएं और संसाधन, औद्योगिक नीतियों, प्रस्तावित नीतियों, इंदौर संभाग में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए किये जा रहे कार्यों आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। महिलाओं के लिए रोजगार पर दिया जोर बैठक में यह भी तय किया गया कि, निवेशकों की सुविधा के लिए एक समर्पित हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। जहां वे अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही उद्योगपतियों ने प्रशासन का ध्यान महिलाओं की तरफ आकर्षित करवाते हुए कहा कि, हम लोग इन्वेस्टमेंट पर तो फोकस कर रहे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए रोजगार की व्यवस्था करना चाहिए। इंदौर में उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन को लेकर उद्योगपतियों और विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि इंदौर में पहले से ही मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो चुका है, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी औद्योगिक विकास के लिए ठोस प्रयासों की जरूरत है। प्रमुख उद्योगपतियों ने सुझाव दिया कि, महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मल्टी-मॉडल इंडस्ट्रियल हब और महिला केंद्रित कॉरिडोर बनाए जाएं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। इसके साथ ही, स्टार्टअप और आईटी कंपनियों के लिए विशेष ज़ोन विकसित करने की भी मांग उठाई गई। सरकार से तेजी से भूमि आवंटन करने की अपील पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर भी उद्योगपतियों ने सरकार से तेजी से भूमि आवंटन करने की अपील की। उनका कहना है कि, कई कंपनियां विस्तार करना चाहती हैं, लेकिन जमीन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसके अलावा, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार से इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी में सुधार की मांग की गई। जिसमें सब्सिडी और टैक्स से जुड़े प्रावधानों में राहत देने की बात कही गई। होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी सुझाव दिया कि, मध्य प्रदेश में पर्यटन उत्सवों की तारीखें पहले से तय की जाएं, ताकि देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।


