ग्वालियर-चंबल अंचल में पेट्रोल में मिलावट की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि कुछ पंपों पर पेट्रोल में पानी मिलाया जा रहा है। जिससे गाड़ियां खराब हो रही हैं। इन शिकायतों के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और नमूने एकत्र किए हैं। अंचल पहले से ही दूध, दही, पनीर और मसालों में मिलावट के लिए बदनाम रहा है। उपभोक्ताओं का भी मानना है कि पेट्रोल में पानी मिलाया जा रहा है। पिछले एक साल से ऐसी शिकायतें बढ़ गई हैं। शिकायतें कलेक्टर तक पहुंचीं तो जांच शुरू हुई। पेट्रोल पंपों से सेंपल लिए जा रहे हैं। हालांकि जिले के पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष उदयवीर सिंह का कहना है कि पेट्रोल में कभी भी पानी की मिलावट नहीं की जा सकती है। बारिश या कुछ अन्य समय को छोड़ दें तो पानी पेट्रोल में नहीं मिलाया जा सकता है। क्या है उपभोक्ताओं के जांच के खास अधिकार कई जगहों पर जो तस्वीरें और नमूने सामने आए हैं, वे मिलावट की आशंका को बहुत मजबूत करते हैं, लेकिन प्रशासन की लैब रिपोर्टों और कानूनी कार्रवाई के बिना सीधे कह पाना कठिन है। बता दें कि जिले में 289 पेट्रोल पंप संचालित हैं। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के 107, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के 86, हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 77, एस्सार के 10 और रिलायंस के 9 पंप शामिल हैं। जिले में पेट्रोल और डीजल की दैनिक खपत काफी अधिक है। औसतन प्रतिदिन 4 लाख लीटर पेट्रोल और 6 लाख लीटर डीजल की खपत होती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 1000 से अधिक छोटी-बड़ी बाइक और कार मैकेनिक वर्कशॉप हैं। इन वर्कशॉप के तकनीकी कर्मचारियों के अनुसार, बाजार में मौजूद मिलावटी पेट्रोल, खासकर पानी की मौजूदगी, वाहनों के इंजन और मुख्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा रही है। इससे इंजन के कार्बोरेटर, ब्लॉक और पिस्टन पर सीधा असर पड़ता है, जिससे वाहन खराब हो रहे हैं और मरम्मत का खर्च बढ़ रहा है।


