ग्वालियर पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी:50 संदेहियों से पूछताछ, दिल्ली तक दबिश फिर भी दो माह से “रितेश’ का सुराग नहीं

साल 2025 में ग्वालियर पुलिस ने कई बड़े अपहरण और हत्या के मामलों को चुनौती के रूप में लेते हुए कम समय में सुलझाया, लेकिन तीन साल के रितेश अपहरण कांड को पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है। मोहनपुर गांव से 1 नवंबर को करीब 12:30 बजे लापता हुए रितेश को आज तक तलाशा नहीं जा सका है। आज (1 जनवरी 2026) को इस घटना को पूरे दो महीने हो चुके हैं, लेकिन पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। पुलिस ने बीते दो महीनों में इस मामले की हर एंगल से जांच की। ग्वालियर, आगरा, झांसी और दिल्ली तक दबिश दी गई। करीब 50 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की गई। इसके बावजूद रितेश का कोई सुराग नहीं मिला। इस बीच मासूम की मां की उम्मीद आज भी कायम है कि एक दिन उनका बेटा लौटेगा और फिर से उनकी गोद में खेलेगा। मां और ननिहाल पक्ष पुलिस के संदेह में जांच के दौरान पुलिस का संदेह बच्चे की मां और ननिहाल पक्ष पर ही टिक गया। इसी कारण लापता बच्चे के माता-पिता और ननिहाल पक्ष को धार्मिक कसम तक खाने के लिए कहा गया। पुलिस और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में दोनों परिवारों ने गिरगांव महादेव (मजिस्ट्रेट) पर कसम खाई कि वे इस मामले में निर्दोष हैं। धर्म का सहारा, फिर भी नहीं टूटा शक 2 दिसंबर 2025 को बच्चे के बाबा और ननिहाल पक्ष से जुड़े कम से कम 10 लोगों ने गिरगांव महादेव में कसम खाई। कसम के बाद परिवारों को उम्मीद थी कि पुलिस उन्हें परेशान नहीं करेगी, लेकिन इसके बावजूद ननिहाल पक्ष पुलिस के रडार पर बना हुआ है। पंचायत का फैसला, फिर भी विवाद जारी गिरगांव महादेव में कसम के बाद पंचायत ने पांच दिन की मियाद तय की थी। फैसला यह था कि यदि पांच दिन के भीतर किसी भी पक्ष के यहां जनहानि, 50 हजार रुपए तक का नुकसान या किसी को चोट लगती है, तो वह पक्ष दोषी माना जाएगा। पांच दिन बीतने के बाद कोई घटना नहीं हुई, जिससे दोनों पक्ष दोषमुक्त माने गए। हालांकि, इसके बाद भी दोनों परिवारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। बच्चे के पिता दलवीर का आरोप है कि बच्चे की मामी ज्योति फिसलकर गिर गईं और उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है, लेकिन जानबूझकर इलाज नहीं कराया जा रहा। वहीं, बच्चे के मामा राजू और मां सपना का कहना है कि दलवीर के घर में रहने वाला उनका बड़ा बेटा गिरकर घायल हुआ है। सवालों में घिरी पुलिस जांच दो महीने बीत जाने के बावजूद मासूम रितेश का कोई पता नहीं चल सका है। जांच की दिशा, पारिवारिक विवाद और लगातार बदलते आरोप इस मामले को और उलझाते जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाएगी या रितेश अपहरण कांड 2025 की सबसे बड़ी अनसुलझी फाइल बनकर रह जाएगा। पुलिस ने अभी तक क्या किया
– ड्रोन से घटनास्थल के आसपास जंगल में सर्चिंग की।
– 500 जवान व अफसर जंगल में छानबीन के लिए उतारे।
– दोनों पक्ष के 50 से ज्यादा संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुके हैं।
– बच्चे की मां, मामी व पिता और दादा को थाना लाकर कड़ी पूछताछ की है।
– परिवार के आसपास रहने व संपर्क वालाें को पकड़कर पूछताछ की है।
– परिवार के सभी सदस्यों की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) खंगाल चुके हैं।
– घटना के समय वहां कितने मोबाइल एक्टिव थे यह भी छान चुके हैं।
– ग्वालियर से दिल्ली तक दबिश दे चुकी है पुलिस।
ऐसे समझिए पूरा मामला
ग्वालियर के मुरार मोहनपुर गांव के काली माता मंदिर के पास रहने वाली सपना पाल की शादी चंदन नगर निवासी दलवीर सिंह से हुई थी। दोनों के दो बेटे हैं। दोनों में अक्सर विवाद होता रहता था। यही कारण है कि छह माह से सपना पाल पति से अलग मोहनपुर में पिता रामवीर पाल के घर (मायके) में रह रही थी। बड़ा बेटा पति के पास है, जबकि छोटा बेटा तीन वर्षीय रितेश पाल, सपना के साथ था। सपना ने पति की शिकायत महिला थाना में की है। सपना ने बताया कि शनिवार (1 नवंबर) दोपहर 12 बजे रितेश घर के आंगन में अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। अन्य बच्चे कुछ देर बाद पास ही जंगल में बकरी लेकर चले गए, जबकि मासूम वहीं खेल रहा था। 30 मिनट बाद जब सपना बेटे को बुलाने पहुंची तो वह वहां नहीं था। परिजन ने अपने स्तर पर उसे तलाश किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिला। इसके बाद शनिवार शाम को परिजन मुरार थाना गए और सूचना दी। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी, लेकिन दो महीने बाद भी खाली हाथ है। पुलिस का कहना है
ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि बच्चे की तलाश में पुलिस टीम लगातार लगी हुई हैं। अभी तक कई लापता बच्चे घर लौटाए हैं। यह बच्चा भी घर लौटाकर ही चेन लेंगे। इस मामले में लगाकर जांच की जा रही है। इस खबर को भी पढ़िए… 50 दिन से लापता मासूम रितेश का सुराग नहीं ग्वालियर के मोहनपुर गांव से 50 दिन पहले लापता हुए मासूम रितेश का अब तक कोई सुराग नहीं लग सका है। दोनों परिवार गिरगांव महादेव (मजिस्ट्रेट महादेव) पर कसम भी खा चुके हैं। महादेव की अदालत से बेगुनाह साबित होने के बाद परिवारों को उम्मीद थी कि पुलिस उन्हें परेशान नहीं करेगी। पढ़ें पूरी खबर…

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